मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के सहारे 70 बांग्लादेशी घुसपैठियों के भारतीय पासपोर्ट तैयार कराने वाले अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी, जो मित्यानंद भिक्षु के नाम से भी जाना जाता है, को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आखिर इन 70 बांग्लादेशियों का मकसद सिर्फ पासपोर्ट हासिल करना था, या इसके पीछे कोई बड़ा देशविरोधी मंसूबा भी छिपा था, क्योंकि मास्टरमाइंड ने अपने ठिकाने देश के सबसे संवेदनशील सैन्य इलाकों के आसपास ही बनाए थे।
नौ साल पहले अवैध रूप से घुसा था भारत में
एसटीएफ की पूछताछ में रियाल चौधरी ने कबूल किया कि वह 2017 में अवैध रूप से बांग्लादेश की सीमा पारकर भारत में दाखिल हुआ था। कुछ समय असम में रहने के बाद उसने धर्म की आड़ ली और मध्य प्रदेश के दो प्रमुख शहरों को अपनी गतिविधियों का केंद्र बना लिया।
सैन्य ठिकानों के बिल्कुल पास बनाए सेफ हाउस
रियाल ने बैतूल के आमला स्थित बौद्ध विहार में लंबे समय तक डेरा जमाया, जो देश के प्रमुख वायुसेना स्टेशन (28 इक्विपमेंट डिपो) से महज 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। इसी मठ के पते का इस्तेमाल कर उसने कई बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनवाए, जो बाद में फरार हो गए। इसके अलावा, ग्वालियर के डबरा क्षेत्र के सिमरिया गांव स्थित तथागत बुद्ध विहार और अंबेडकर पार्क को दूसरा बड़ा केंद्र बनाया गया, जो टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी से सिर्फ 8 से 8.5 किलोमीटर दूर है। ग्वालियर में मौजूद वायुसेना के सामरिक एयरबेस को लेकर भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पहले यहां जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी एजेंट भी पकड़े जा चुके हैं।
कोरोना लॉकडाउन का उठाया फायदा, भाषा भी नहीं समझते थे ग्रामीण
पड़ताल में सामने आया कि सिमरिया टेकरी के आसपास बने बौद्ध विहार में कुछ साल पहले अनजान लोग आकर ठहरे थे, जिनकी भाषा स्थानीय ग्रामीण बिल्कुल नहीं समझ पाते थे। मास्टरमाइंड ने इस फर्जीवाड़े के लिए कोरोना काल के लॉकडाउन का समय चुना, जब निगरानी कमजोर थी।
अब तक पांच लोग गिरफ्तार
एसटीएफ ने इस मामले में मास्टरमाइंड रियाल चौधरी के अलावा विप्लव अधिकारी, प्रयान रॉय, जॉय चौधरी और भोपाल के पासपोर्ट दलाल नसीम अखतर को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हैं।
