श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के कुशल और व्यवस्थित संचालन के लिए एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। बुधवार को अयोध्या की मणिरामदास छावनी में महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में हुई ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में तीन नए सदस्यों को भी ट्रस्ट में शामिल करने की घोषणा की गई, जिनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं।
चार दशक के सैन्य अनुभव के साथ नई जिम्मेदारी
देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव के मूल निवासी मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। अपने करियर में उन्होंने 18 से अधिक तरह के विमानों पर उड़ान भरी और 3,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव हासिल किया। वे कमांडिंग-इन-चीफ और एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।
कब-क्यों हुई राम मंदिर की व्यवस्था बदलने की चर्चा?
गौरतलब है कि मई-जून में मंदिर में दान की चोरी से जुड़े गंभीर खुलासे हुए थे, जिनकी जांच में मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों की संलिप्तता भी सामने आई थी। इसके बाद निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर प्रबंधन सुधारने के लिए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) मॉडल अपनाने का सुझाव दिया था। उन्होंने बताया था कि तिरुपति में कमिश्नर-रैंक के आईएएस अधिकारी को सीईओ नियुक्त किया जाता है, जो पांच से सात साल तक पद पर रहकर पूरा कामकाज संभालता है। उनका यह भी कहना था कि राम मंदिर के सीईओ के पास उत्तर प्रदेश में काम करने का अनुभव होना चाहिए, ताकि वे अयोध्या और राज्य की व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकें। इसी सुझाव के आधार पर अब मिश्रा की नियुक्ति की गई है, जिनके अनुशासन और नेतृत्व अनुभव को मंदिर की नई व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।
