आजकल ज्यादातर लोग रोजाना भरपेट खाना खाते हैं, लेकिन फिर भी शरीर में कमजोरी और बीमारियां बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लोग सिर्फ पेट भरने को ही अच्छी डाइट मान लेते हैं। सफेद चावल या मैदे से बनी चीजें भले ही पेट भर दें, लेकिन अगर थाली में साबुत अनाज, दालें, सब्जियां, फल, नट्स और पर्याप्त प्रोटीन की कमी हो तो यही आदत बीमारियों की जड़ बन सकती है।
थाली का असंतुलन बड़ी समस्या
आहार विशेषज्ञ डॉ. पारुल शर्मा के मुताबिक, सबसे आम गलती थाली में एक ही तरह के भोजन, खासकर चावल या रोटी की मात्रा ज्यादा रखना है, जबकि दाल, सब्जी और सलाद कम होते हैं। इससे पेट तो भर जाता है, पर शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। सेहतमंद रहने के लिए थाली में साबुत अनाज के साथ दालें, सब्जियां, फल और प्रोटीन युक्त चीजों का संतुलन जरूरी बताया गया है।
प्रोसेस्ड फूड और कम फाइबर बड़ा खतरा
चिप्स, बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, मीठे पेय और पैकेज्ड स्नैक्स जैसी अत्यधिक प्रोसेस्ड चीजों में नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा ज्यादा होती है, जो लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि 10 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को रोज कम से कम 400 ग्राम फल-सब्जियां और कम से कम 25 ग्राम प्राकृतिक फाइबर लेना चाहिए। मौसमी फलों का नियमित सेवन फाइबर के साथ जरूरी विटामिन भी देता है।
दुबला दिखना सेहतमंद होने का सबूत नहीं
लेख में यह भी बताया गया है कि सिर्फ वजन देखकर सेहत का अंदाजा लगाना गलत है। एक व्यक्ति बाहर से दुबला या सामान्य वजन का दिख सकता है, लेकिन उसकी डाइट में फाइबर, प्रोटीन या जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी हो सकती है। इसलिए सेहत के लिए कम खाना नहीं बल्कि सही और संतुलित खाना जरूरी है।
नमक-चीनी पर भी रखें नियंत्रण
विशेषज्ञों की सलाह है कि थाली में अलग-अलग रंग की सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज, नट्स और सीड्स शामिल करें। साथ ही कुल कैलोरी में चीनी की मात्रा 10 फीसदी से कम और नमक रोजाना 5 ग्राम से कम रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि ज्यादा नमक-चीनी वाली डाइट गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है; व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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