Wednesday, September 9

श्योपुर। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के लिए खरीदे जा रहे बकरे के मांस को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। चीतों की खुराक के नाम पर होने वाले सरकारी खर्च और मीट सप्लाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बकरों के वास्तविक वजन से कहीं अधिक वजन कागजों में दर्ज कर सरकारी भुगतान कराया गया।

शिकायत में दावा किया गया है कि करीब 30 किलो वजन वाले बकरे को दस्तावेजों में 90 किलो तक का दिखाया गया। यदि ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो सरकारी खजाने को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की आशंका है।

एक साल में बकरे के मांस पर 1.27 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च

कूनो में चीतों की खुराक पर होने वाला खर्च पहले भी चर्चा में रहा है। मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में कूनो वन्यजीव वनमंडल में बकरी का मांस खरीदने पर 1 करोड़ 27 लाख 10 हजार 870 रुपये खर्च किए गए।

यानी एक साल में चीतों के लिए बकरी के मांस की खरीद पर करोड़ों रुपये सरकारी राशि से खर्च हुई। इसी खर्च के बीच अब वजन और भुगतान में कथित गड़बड़ी का आरोप सामने आने से खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

वजन में कथित हेरफेर का आरोप

EOW में दी गई शिकायत का सबसे गंभीर आरोप बकरों के वजन को लेकर है। शिकायतकर्ता का दावा है कि सप्लाई किए गए बकरों का वास्तविक वजन कम था, लेकिन रिकॉर्ड और बिल में वजन अधिक दर्ज किया गया। इसी कथित अंतर के आधार पर भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।

मसलन, करीब 30 किलो के बकरे को 90 किलो का दिखाने का दावा किया गया है। हालांकि यह आरोप सही है या नहीं, इसका फैसला जांच के बाद ही हो सकेगा।

टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल

शिकायत में केवल वजन को लेकर ही सवाल नहीं उठाए गए हैं, बल्कि मीट सप्लाई के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया पर भी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कम दर पर सप्लाई करने वाली निविदाओं को कथित तौर पर दरकिनार कर अधिक कीमत वाली सप्लाई को फायदा पहुंचाया गया।

ऐसे में जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि मीट की खरीद के लिए टेंडर किस आधार पर तय हुए, सप्लाई का वजन किस तरह मापा गया और बिलों का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

चीतों के लिए क्यों जरूरी है बकरे का मांस?

कूनो में अफ्रीकी चीतों को उनके स्वास्थ्य और जरूरत के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाता है। चीतों के पुनर्वास और संरक्षण के लिए भोजन की नियमित आपूर्ति जरूरी है। ऐसे में उनके भोजन की खरीद में किसी भी तरह की अनियमितता केवल आर्थिक मामला नहीं, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ा गंभीर विषय भी बन जाती है।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कूनो में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ उनके भोजन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हुई है। ऐसे में करोड़ों रुपये के खर्च की निगरानी और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

अब जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल कूनो में बकरे के वजन और मीट खरीद में गड़बड़ी के आरोप शिकायत के स्तर पर हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। जांच में अगर वास्तविक वजन और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज वजन के बीच बड़ा अंतर सामने आता है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

अब सवाल यह है कि क्या चीतों के लिए खरीदे गए बकरों का वजन वास्तव में उतना ही था, जितना सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किया गया? क्या भुगतान वास्तविक सप्लाई के आधार पर हुआ या कागजों में वजन बढ़ाकर सरकारी राशि निकाली गई?

इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल ‘बकरा घोटाले’ के आरोप ने कूनो में चीतों की खुराक पर होने वाले सरकारी खर्च और पूरी खरीद व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है।

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