Friday, October 23

झारखंड पुलिस के 300 जवानों की संपत्ति का ब्योरा भरने के लिए HRMS पोर्टल खोलने का मामला गरमाया; वित्त मंत्री ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले की समीक्षा करने और उचित निर्णय लेने का आग्रह किया।

झारखंड में पुलिसकर्मियों की संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन जमा करने के लिए HRMS पोर्टल दोबारा खोलने का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मुद्दे पर कार्मिक विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो के रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने 14 अक्टूबर को मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरे मामले की समीक्षा करने का आग्रह किया है। पत्र में मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शासन-प्रशासन संवेदनशीलता से चलता है, हठधर्मिता से नहीं।

मामला झारखंड पुलिस के करीब 300 जवानों से जुड़ा है, जो निर्धारित समय के भीतर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण HRMS पोर्टल पर दर्ज नहीं कर सके थे। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ पुलिसकर्मी अभियान और जरूरी ड्यूटी में तैनात होने के कारण तय अवधि में ऑनलाइन विवरण जमा नहीं कर पाए। अब उन्हें संपत्ति का ब्योरा दर्ज करने का एक और मौका देने के लिए पोर्टल खोलने की मांग की जा रही है।

मंत्री और कार्मिक सचिव के बीच क्या हुई बात?

मंत्री राधाकृष्ण किशोर के मुख्य सचिव को लिखे पत्र के अनुसार, उन्होंने अपने कार्यालय में कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो को बुलाकर इस मामले पर चर्चा की थी। मंत्री ने सवाल उठाया था कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपनी संपत्ति का विवरण जमा करना चाहता है, तो पोर्टल खोलने में वैधानिक अड़चन क्या है?

पत्र में दर्ज विवरण के मुताबिक, कार्मिक सचिव ने कहा था कि साल के बीच में पोर्टल खोलने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह आशंका भी जताई थी कि अगर बीच वर्ष में पोर्टल खोलने की अनुमति दी गई, तो दूसरे कर्मचारी भी ऐसा करने की मांग कर सकते हैं और फिर पोर्टल को सालभर खुला रखना पड़ सकता है।

मंत्री के पत्र के मुताबिक, जब उन्होंने पूछा कि पोर्टल सालभर खुला रहने से प्रशासनिक स्तर पर क्या नुकसान होगा, तो सचिव ने पोर्टल नहीं खोलने की बात कही। इसी रवैये पर मंत्री ने आपत्ति जताते हुए मुख्य सचिव से मामले को अपने स्तर पर देखने का आग्रह किया है।

मुख्य सचिव से समीक्षा कर उचित निर्णय लेने का आग्रह

मंत्री ने अपने पत्र में मुख्य सचिव से यह देखने को कहा है कि संबंधित कर्मचारियों को संपत्ति का ब्योरा जमा करने के लिए HRMS पोर्टल खोलने से प्रशासनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ेगा। यदि ऐसा कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, तो पोर्टल खोलने का आदेश देने का आग्रह किया गया है।

मंत्री का जोर इस बात पर है कि ड्यूटी या अन्य जरूरी परिस्थितियों के कारण समय पर विवरण जमा नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों के मामले पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, पोर्टल दोबारा खोलने का अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक स्तर पर होना है।

संपत्ति का ब्योरा नहीं देने पर प्रमोशन और एसीपी पर असर

नियमित व्यवस्था के तहत सरकारी पदाधिकारियों और पुलिसकर्मियों को हर साल जनवरी और फरवरी में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी संपत्ति का विवरण जमा करना होता है। निर्धारित समय में विवरण जमा नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों के सामने अब तकनीकी और सेवा संबंधी परेशानी खड़ी हो सकती है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यदि संबंधित पुलिसकर्मियों को पोर्टल खोलकर पिछली अवधि का विवरण जमा करने का अवसर नहीं मिलता है, तो जनवरी-फरवरी 2027 में पोर्टल खुलने पर वे वर्ष 2026 की संपत्ति का विवरण तो जमा कर सकेंगे, लेकिन वर्ष 2025 का छूटा हुआ विवरण दर्ज करने में परेशानी हो सकती है।

इसका असर उनकी प्रोन्नति और एसीपी (सुनिश्चित करियर प्रोन्नयन) जैसे सेवा लाभों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से पुलिसकर्मियों के लिए पोर्टल दोबारा खोलने की मांग महत्वपूर्ण हो गई है।

पहले भी उठाया गया था मामला

बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों के संगठन ने इस समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग स्तरों पर प्रयास किए थे। मामला मंत्री और गृह सचिव तक भी पहुंचा, लेकिन पोर्टल खोलने को लेकर सहमति नहीं बन सकी। अब वित्त मंत्री के मुख्य सचिव को पत्र लिखने के बाद इस मुद्दे पर प्रशासनिक निर्णय का इंतजार है।

फिलहाल, मुख्य सचिव की ओर से इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और पुलिसकर्मियों को संपत्ति का विवरण जमा करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिलता है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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