कोडरमा: सीडी बालिका मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, झुमरी तिलैया के प्रभारी प्रधानाध्यापक कुमार शशिभूषण सिंह के निलंबन के बाद छात्राओं के प्रदर्शन का मामला अब एक नया मोड़ लेता दिख रहा है। प्राचार्य के समर्थन में छात्राओं के कक्षा छोड़कर प्रदर्शन करने के बाद अब जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से जारी विभागीय पत्र और निलंबन आदेश सामने आए हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, शशिभूषण सिंह के खिलाफ उच्चाधिकारी के आदेश और विभागीय निर्देशों की अवहेलना के आरोप में कार्रवाई की गई है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से 27 अक्टूबर 2026 को जारी पहले स्पष्टीकरण पत्र में शिक्षक के विरमण का मामला उठाया गया है। पत्र के अनुसार, श्री अमित कुमार, स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक का पदस्थापन उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बच्छेडीह, प्रखंड डोमचांच में किया गया था। इसके बावजूद शशिभूषण सिंह की ओर से अमित कुमार के विरमण से संबंधित सूचना जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसे उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना और कार्य के प्रति लापरवाही बताते हुए 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
इसके अगले दिन यानी 28 अक्टूबर को झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 के सफल संचालन को लेकर डीसी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अनुपस्थित रहने पर दूसरा स्पष्टीकरण पत्र जारी किया गया। पत्र में कहा गया है कि 28 अक्टूबर को सभी केंद्राधीक्षकों, स्टैटिक दंडाधिकारियों और पेट्रोलिंग मजिस्ट्रेट के साथ बैठक बुलाई गई थी, लेकिन केंद्राधीक्षक के रूप में शशिभूषण सिंह अनुपस्थित पाए गए। विभाग ने इसे घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना बताते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।
इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने 2 नवंबर 2026 को कार्यालय आदेश जारी कर शशिभूषण सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में उच्चाधिकारी और विभागीय आदेशों के उल्लंघन को निलंबन का आधार बताया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), कोडरमा निर्धारित किया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि उनके खिलाफ आरोप पत्र अलग से जारी किया जाएगा और निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
इधर, प्राचार्य के निलंबन की खबर सामने आने के बाद विद्यालय की छात्राओं ने कक्षाएं छोड़कर प्रदर्शन किया था। छात्राओं ने शशिभूषण सिंह का स्थानांतरण रद्द करने और उन्हें पहले की तरह विद्यालय में बनाए रखने की मांग की थी। छात्राओं का कहना था कि उनके कार्यकाल में पढ़ाई और अनुशासन की व्यवस्था बेहतर हुई थी। ऐसे में उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पर छात्राओं ने नाराजगी जताई थी।
अब विभागीय दस्तावेजों में सामने आए आरोपों और छात्राओं के समर्थन के बीच यह मामला चर्चा में है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों में शशिभूषण सिंह की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण या विभागीय आरोपों पर उनका पक्ष दर्ज नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि उन्होंने दोनों नोटिस का क्या जवाब दिया था और निलंबन से पहले उनके जवाब पर विभाग ने क्या विचार किया।
