Tuesday, September 22

धुर्वा और पतरातू डैम लबालब ; लेकिन बूंद बूंद को तरस रहे लोग , कौन है जवाबदेह ?

रांची में भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं और पतरातू व धुर्वा, दोनों डैम पानी से लबालब भरे हैं। इसके बावजूद इन डैमों के आसपास के इलाकों के लोग पिछले 6 महीने से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब जलाशयों में पानी की कमी नहीं, तो लोगों तक पानी क्यों नहीं पहुंच रहा और इसकी जवाबदेही किसकी है ?

HEC के लोगों का कहना है कि धुर्वा डैम का पानी विधायक आवास, रांची स्मार्ट सिटी और HEC प्रबंधन को दिया जा रहा है। दूसरी ओर, बीते छह महीने से HEC के लोग पानी के लिए परेशान हैं। इस बारे में जब झारखंड डिजिटल की टीम ने धुर्वा डैम के कार्यपालक अभियंता ( Executive Engineer) आनंद कुमार सिंह से पूछा , तो उन्होंने कहा कि डैम में पानी भरा है और सप्लाई भी हो रही है। HEC प्रबंधन को पूर्व में जितने पानी की सप्लाई की जा रही थी अभी भी उतने पानी की सप्लाई की जा रही है। लेकिन अहम सवाल यह है कि जब पानी की सप्लाई पूरी है तब फिर आम लोगों तक पानी क्यों नहीं पहुंचाया जा रहा है। पानी की दिक्कत के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब HEC प्रबंधन ही दे पाएगा। लोगों का कहना है कि आम लोगों के हिस्से का पानी  के  HEC प्रबंधन के पदाधिकारी डकार जा रहे हैं। फाटक को लेकर उन्होंने बताया कि इस साल बारिश तो बहुत हुई है, लेकिन धुर्वा डैम का फाटक अब तक नहीं खोला गया है। यह फाटक 17 साल बाद अगस्त 2025 में खोला गया था।

पतरातू के लोगों का भी हाल बेहाल

ऐसा ही एक ताज़ा मामला सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र के रिवरसाइड इलाके की कॉलोनी की है जहां नल सूखे पड़े हैं। पिछले तीन-चार माह से यहां के लोग पीने के पानी के लिए जूझ रहे हैं। कारण हैं बिजली, मोटर पंप और जर्जर पाइपलाइन की खराबी के कारण पतरातू वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। बता दे इस साल जलस्तर बढ़ने के कारण पतरातू डैम के 4 फाटक खोल दिया गया है और जलस्तर 1330 रेडियस लेवल तक पहुंच चुका है। फिर भी डैम के आस पास के इलाके में पानी की किल्लत देखी जा रही है।

बार-बार खराब होते हैं पंप

रिवरसाइड की इमलीगाछ, चीफ हाउस, दोतल्ला, जवाहरनगर, पटेलनगर सहित पंचायत क्षेत्र की दर्जनों कॉलोनियां पतरातू प्लांट की जलापूर्ति पर निर्भर हैं। ऑफिसर कॉलोनी, स्टाफ कॉलोनी और बुधबाजार क्षेत्र में सप्लाई सेंटर से पानी दिया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पतरातू में बिजली की आंख-मिचौली और पुराने पंपों के बार-बार खराब होने से कई-कई दिनों तक जलापूर्ति ठप रहती है।

एक पंप पर छह क्षेत्रों का भार

जलसंकट की बड़ी वजह तीन नंबर पोखरिया की व्यवस्था को बताया जा रहा है। यहां फिलहाल एक ही मोटर पंप से भुरकुंडा, जवाहरनगर, पटेलनगर, नीचे धौड़ा, रिवरसाइड और सेंट्रल कॉलोनी सहित छह क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जा रहा है। पर्याप्त प्रेशर नहीं बन पाने से लोगों को सप्ताह में एक-दो दिन ही पानी मिल रहा है, वह भी करीब आधे घंटे के लिए।

बुधबाजार, दुदुवा, शिवनगर और बीटीटीआई कॉलोनी में तो कई महीनों से डैम का पानी पहुंचने की ही बात सामने आ रही है। लोग चापानल और दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर हैं, जबकि कई लोगों को टैंकर और जार का पानी खरीदना पड़ रहा है।

आंदोलन और ट्रांसपोर्टिंग रोकने की चेतावनी

यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन के नरेश मंडल ने असैनिक विभाग की लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पतरातू प्लांट में बिजली, मोटर पंप और पाइपलाइन की समस्याएं लंबे समय से बनी हैं और तीन पंपों की जगह एक से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक सप्ताह में सुधार नहीं हुआ तो सीसीएल प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन होगा।

चीफ हाउस पंचायत के मुखिया विकास पांडेय ने भी प्रबंधन को पत्र देकर एक सप्ताह के भीतर नियमित जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है। ऐसा न होने पर उन्होंने ट्रांसपोर्टिंग ठप करने की चेतावनी दी है और कहा है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरे हालात

मुख्यालय की वेलफेयर टीम ने 12 सितंबर को क्षेत्र का निरीक्षण किया था। टीम ने फिल्टर प्लांट और कॉलोनियों का जायजा लिया और जलापूर्ति की समस्या प्रमुखता से सामने आई। बताया गया कि प्लांट में गंदगी और अव्यवस्था देखकर टीम ने नाराजगी जताई थी। प्रबंधन ने सभी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

धुर्वा और पतरातू का पानी का लेवल कितना बढ़ा ?

लगातार बारिश के कारण सितम्बर माह तक रांची के धुर्वा डैम का जलस्तर बढ़कर 37.8 फीट (कुल क्षमता 38 फीट) और रामगढ़ स्थित पतरातू डैम का जलस्तर बढ़कर लगभग 1327.10 आरएल (RRL) तक पहुंच गया।

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