राजधानी रांची से सटे रातू प्रखंड के काठीटांड़ क्षेत्र में अवैध बालू, गिट्टी और डस्ट के गैर-कानूनी कारोबार तथा अनियंत्रित भंडारण से स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। इस गंभीर समस्या से उबकर क्षेत्र के करीब 175 ग्रामीणों ने एकजुट होकर रांची के उपायुक्त (डीसी) को एक हस्ताक्षरयुक्त शिकायत पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच करने, अवैध भंडारण स्थलों पर अविलंब छापेमारी करने और इस अवैध धंधे में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, दिन-रात दौड़ रहे भारी वाहन
शराबियों और जुआरियों का अड्डा बना रिहायशी इलाका
‘अरविंद’ का खौफ और खाकी का संरक्षण: दबी जुबान में ग्रामीणों का बड़ा खुलासा
स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर दबी जुबान से एक सनसनीखेज खुलासा किया है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरे इलाके में अवैध बालू और गिट्टी के काले कारोबार का सबसे बड़ा खिलाड़ी ‘अरविंद’ नामक बालू माफिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अरविंद का नेटवर्क इतना मजबूत है और स्थानीय पुलिस व प्रशासन के साथ उसकी सांठ-गांठ इतनी गहरी है कि उसके खिलाफ कोई भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। क्षेत्र में उसका इतना दहशत और रसूख है कि अवैध डंपिंग और ओवरलोडेड गाड़ियां बेरोक-टोक दौड़ती रहती हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस बात की निष्पक्ष जांच करेंगे कि आखिरकार यह बालू माफिया ‘अरविंद’ कौन है और उसे किसका राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
रिहायशी इलाकों और स्कूलों के पास अवैध डंपिंग यार्ड
उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, काठीटांड़ बस्ती, विद्या मंदिर स्कूल, प्रेसिडेंसी पब्लिक स्कूल और रानी बगीचा के आसपास के घने रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से बालू, गिट्टी और डस्ट का अवैध भंडारण किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन डंपिंग स्थलों तक सामग्री पहुंचाने और ले जाने के लिए दिन-रात भारी-भरकम हाइवा और डंपर बेधड़क दौड़ते रहते हैं। घनी आबादी वाले मोहल्लों में इन भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन से हर समय भीषण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
मासूम स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर गहराया संकट
सबसे भयावह और चिंताजनक स्थिति दो प्रमुख शिक्षण संस्थानों—विद्या मंदिर स्कूल और प्रेसिडेंसी पब्लिक स्कूल—के आसपास की है। इन स्कूलों में रोजाना सैकड़ों छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं। जिस वक्त बच्चे स्कूल आते-जाते हैं, ठीक उसी समय भारी डंपर और हाइवा सड़कों पर तेज गति से दौड़ते हैं। इससे बच्चों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। अभिभावक और शिक्षक हर पल किसी अनहोनी के डर से सहमे रहते हैं।
असामाजिक तत्वों, नशेड़ियों और जुआरियों का बना ठिकाना
अवैध बालू और गिट्टी के भंडारण स्थलों के आसपास का माहौल पूरी तरह से दूषित हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन जगहों पर दिन-ढलते ही असामाजिक तत्वों, नशेड़ियों और जुआरियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। देर रात तक चलने वाले इस अड्डेबाजी के कारण मोहल्ले की महिलाओं, बेटियों और बुजुर्गों का घर से निकलना भी मुहाल हो गया है। स्थानीय लोगों के लिए अपने ही इलाके में शांति से जीवन बसर करना मुश्किल हो गया है।
इन अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने इस शिकायत पत्र की प्रतिलिपि केवल उपायुक्त तक ही सीमित नहीं रखी है, बल्कि प्रशासनिक व पुलिस महकमे के सभी प्रमुख पदाधिकारियों को भी सौंपी है। प्रतिलिपि प्राप्त करने वाले अधिकारियों में शामिल हैं:
वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), रांची
अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM), रांची
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (Rural SP), रांची
जिला खनन पदाधिकारी (DMO), रांची
पुलिस उपाधीक्षक (DSP) मुख्यालय-2
अंचल अधिकारी (CO), रातू
थाना प्रभारी, रातू थाना
अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
175 से अधिक ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त इस मांग पत्र के बाद अब पूरे काठीटांड़ क्षेत्र की नजरें जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना यह है कि क्या प्रशासन अवैध बालू माफियाओं पर नकेल कसकर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को सुरक्षित माहौल दे पाता है या माफियाओं का यह बेखौफ कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
