रांची: झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा। मंगलवार, 3 नवंबर को शीर्ष अदालत में झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों में DGP की नियुक्ति से जुड़े मामले पर सुनवाई होनी है। इस दौरान पूर्व IPS अधिकारी प्रकाश सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका के साथ झारखंड की DGP नियुक्ति नियमावली को चुनौती देने वाली नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

इस मामले पर सबकी नजरें इसलिए टिकी हैं, क्योंकि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की DGP नियुक्ति नियमावली के एक प्रावधान पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने प्रथम दृष्टया इसे प्रकाश सिंह मामले में दिए गए अपने पुराने फैसले के विपरीत बताया था। साथ ही मौजूदा DGP तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था।
बाबूलाल मरांडी ने नियमावली को दी है चुनौती
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार की ओर से बनाई गई DGP नियुक्ति नियमावली को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की है। उनका पक्ष है कि राज्य सरकार की नियमावली सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले के अनुसार, DGP पद के लिए ऐसे अधिकारियों पर विचार किया जाना चाहिए, जिनकी सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का कार्यकाल शेष हो। लेकिन झारखंड की वर्ष 2025 की नियमावली में इस शर्त से जुड़े प्रावधान में बदलाव किया गया था। इसी बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी अदालत की नजर
तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को झारखंड का DGP नियुक्त किया गया था। वह 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति के साथ-साथ राज्य की DGP नियुक्ति नियमावली को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
8 अक्टूबर 2026 को हुई पिछली सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि छह महीने से कम की शेष सेवा वाले अधिकारी को DGP नियुक्त करने की अनुमति देने वाला प्रावधान प्रथम दृष्टया प्रकाश सिंह फैसले के विपरीत प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि नियमावली रद्द होती है, तो तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी असर पड़ सकता है। इसी कारण उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
पहले भी हो चुकी है कई चरणों में सुनवाई
इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त 2026 को भी सुनवाई हुई थी। उस दौरान अदालत ने UPSC और एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) से मामले में पक्ष रखने को कहा था। इसके बाद 29 सितंबर को भी सुनवाई हुई। 8 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने झारखंड सरकार को विवादित नियम पर दोबारा विचार करने या अपना जवाब दाखिल करने का विकल्प दिया था।
अदालत ने न्याय मित्र को दूसरे राज्यों में DGP नियुक्ति से जुड़े नियमों और कानूनों की भी जांच करने को कहा था। UPSC को इस प्रक्रिया में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था।
अब 3 नवंबर को होने वाली सुनवाई में झारखंड सरकार, तदाशा मिश्रा और अन्य पक्षों का रुख अहम रहेगा। फिलहाल नियुक्ति नियमावली की वैधता और मौजूदा DGP की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।


