झारखंड डीजिटल टीम
JPSC परीक्षा में FRO के पद 25 लाख तो ACF के पद 35 लाख में बिके
JPSC का PIL मैनेज करने के लिए 3 करोड़ की डील
CID की पूछताछ में देवघर के रहने वाले अभय तिवारी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. अभय तिवारी ने खुलासा किया है कि (फारेस्ट रेंज आफिसर ) FRO और ACF (असिस्टेंट कंजर्वेटर आफ फारेस्ट) के लिए उसने 20 प्रतियोगियों से करीब 5 करोड़ 80 लाख रुपयों की वसूली की थी. अभय ने CID टीम को बताया कि FRO के एक पद के लिए 20 से 25 लाख की बोली लगाई गई थी जबकि ACF के पद के लिए 30 से 35 लाख की बोली लगी थी. अभय तिवारी और उसके दलालों ने मिलकर FRO के कुल 12 कैंडिडेट दिए जबकि ACF के 8 कैंडिडेट दिए. मतलब कुल 20 कैंडिडेट से 5 करोड़ 80 लाख की उगाही की गई.
20 में 19 कैंडिडेड पास, 1 फेल
अभय तिवारी ने FRO और ACF के जो 20 कैंडिडेट दिए थे उनमें 19 कैंडिडेट उत्तीर्ण हुए जबकि एक कैंडिडेट फेल कर गया. छत्तरपुर का रहने वाला संतोष राम इसमें फेल कर गया था. यहां गम्भीर मामला यह है कि दो प्रतियोगी ऐसे थे जो कैंडिडेंट होने के साथ साथ JPSC के दलाल भी थे. अभय के खुलासों से यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर रहे कई ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने रुपये देकर पद खरीद लिया है.
श्वेता गुप्ता ने कहा ख्यांगते ने जबरन निकलवाया रिजल्ट
CID की पूछताछ में डीप्टि परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने बताया कि उसपर जबरन दवाब बनाकर JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते ने रिजल्ट निकलवाया. उन्होंने अपने बयान में कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते ने उनसे कहा कि पीटी और मेन्स दोनों के नम्बर तुम्हारे पास है उसके आधार पर रिजल्ट निकालो. श्वेता का दावा है कि वो रिजल्ट निकालने के पक्ष में नहीं थीं.
धर्मेन्द्र के साथ सानंद प्रकाश और रवि मास्टर
CID ने झारखंड के मुख्य सचिव कार्यालय में काम करने वाले धर्मेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया है. मंगलवार को उसके रिमांड की अवधि खत्म होने वाली थी इसलिए उसे और 5 दिनों के रिमांड पर लिया गया है. CID को धर्मेन्द्र के साथ मुख्य सचिव कार्यालय में काम करने वाले एक अन्य व्यक्ति सानंद प्रकाश की तलाश है . सानंद प्रकाश और पतंजली आईएएस एकेडमी में पढ़ाने वाले रवि मास्टर ने भी परीक्षा गड़बड़ी में प्रतियोगी तलाशने से लेकर वसूली तक का काम संभाला है.
पटना का इमरान, गिरिडीह का राजेश, बोकारो का शंकर और हजारीबाग का सुनील था दलाल
पुरी की पूरी परीक्षा प्रणाली को दूषित करने में अभय तिवारी के साथ दिल्ली के शैंटी और लालू के अलावा पटना का इमरान, गिरिडीह का राजेश, बोकारो का शंकर और हजारीबाग का सुनील शामिल था. इनलोगों ने कई कैंडिडेट से रुपयों की वसूली की और अभय तिवारी के माध्यम से इन्हें परीक्षाओं में पास करवाया. यह लोग अलग अलग शहरों से कैंडिडेट लाते थे जिन्हें परीक्षा में पास कराकर करोड़ों की वसूली की जाती थी.
जानिए अभय तिवारी को ..स्टेशन रोड के प्रकाश रेसिडेंसी से JPSC तक
अभय तिवारी की शुरुआत रांची के हरमू से हुई थी. उसने अपने पार्टनर उमेश कुमार के साथ मिलकर 10 लाख रुपयों की पूंजी से एक होटल की शुरुआत की थी. इसके लिए सुधीर प्रसाद नामक व्यक्ति को 5 लाख रुपये भुगतान किए गए थे. बाद में होटल का नाम स्वीट एंड स्पाइस रखा गया. इसके बाद दोनों ने मिलकर स्टेशन रोड में प्रकाश रेसिडेंसी नामक होटल लिया. तिवारी यहीं नहीं रुका उसने जिवनकेसी सप्सेलाई एवं सर्विसेज (JSR) एजेंसी कंपनी खोल ली . यह कंपनी मैनपावर सप्लाई करती थी. इसी कंपनी के संचालन के दौरान उसने दिल्ली के मित्र शैंटी और कोडरमा के लालू के साथ मिलकर JPSC तक का सफर तय किया. लालू ने ही उसकी मुलाकात TDPL के संचालक सतपाल सिंह और रामवीर सिंह से करायी थी. पूरे प्रकरण में अभय तिवारी को TDPL का काम देखने की एवज में 10 प्रतिशत का कमीशन मिलना था. विभिन्न माध्यमों से अभय तिवारी ने कैंडिडेट से उठाए गए 1 करोड़ रुपए अपने पास रखे थे.
JPSC का PIL मैनेज करने के लिए 3 करोड़ की डील
JPSC और TDPL के करतूतों पर झारखंड हाई कोर्ट में शिव शंकर शर्मा ने एक PIL दायर किया था. इस PIL को मैनेज करने के लिए 3 करोड़ की डील हुई थी. इसके एडवांस के रूप में अभय तिवारी ने सैनिक मार्केट में दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति के हाथों 5 लाख रुपए का भुगतान भी किया. यह खुलासा अभय तिवारी ने CID को दिए अपने बयान में किया है. अभय तिवारी ने CID को बताया कि इस डील की जानकारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी थी. इस काम के लिए 50 हजार रुपये और एक दारु की बोतल देने का बयान भी शामिल है. हालांकि, शिव शंकर शर्मा की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है.
