Friday, October 16

रांची। पुलिस की वर्दी आम लोगों के लिए सुरक्षा, भरोसे और कानून की पहचान मानी जाती है। लेकिन जब इसी वर्दी पर किसी महिला के साथ बदसलूकी के आरोप लगें, तो मामला सिर्फ एक व्यक्ति के आचरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। रांची के खेलगांव इलाके से सामने आए एक लिखित आवेदन ने पुलिस महकमे के सामने ऐसा ही गंभीर सवाल खड़ा किया है। एक महिला ने खेलगांव थाना में तैनात मुंशी प्रेमचंद के खिलाफ अभद्र व्यवहार, जबरन छूने की कोशिश और परेशान करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने अपने आवेदन में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए पुलिस से कार्रवाई और न्याय की मांग की है।

पति की शिकायत के बाद पुलिसकर्मी से हुई थी पहचान

महिला के आवेदन के मुताबिक, करीब एक वर्ष पहले उसने अपने पति के खिलाफ मारपीट और शराब की लत को लेकर थाने में शिकायत की थी। उस समय उसकी शिकायत लिखने का काम पुलिसकर्मी प्रेमचंद ने किया था। महिला का आरोप है कि इसी दौरान उसकी पुलिसकर्मी से पहचान हुई और बाद में जब भी वह अपनी शिकायत से संबंधित जानकारी लेने की कोशिश करती, तो उसे थाने बुलाने के बजाय प्रेमचंद कथित तौर पर उसके घर पहुंच जाता था।
आवेदन में महिला ने आरोप लगाया है कि इस दौरान पुलिसकर्मी उसके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता और उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे छूने की कोशिश करता था। महिला का दावा है कि यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा, लेकिन उसने पहले मामले को लेकर आवाज नहीं उठाई।

चाय की दुकान पर पहुंचा पुलिसकर्मी, महिला ने लगाए गंभीर आरोप

महिला के मुताबिक, खेलगांव स्थित उसकी चाय की दुकान पर भी पुलिसकर्मी अक्सर आता था और चाय पीता था। आवेदन में आरोप है कि 28 जुलाई की सुबह करीब छह बजे प्रेमचंद उसकी दुकान पर आया। चाय पीने के बाद उसने कहा कि वह अपना फोन घर पर भूल आया है और पैसे बाद में दे देगा।
महिला के अनुसार, जब वह दूसरे ग्राहकों को चाय देने में व्यस्त थी, तभी पीछे से प्रेमचंद ने उसे पकड़ लिया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। आवेदन में महिला ने कहा है कि मौके पर मौजूद लोगों ने भी इस घटना को देखा और उसे थाने में शिकायत करने की सलाह दी।

कार्रवाई की मांग पर महिला को ही धमकी देने का आरोप

पीड़ित महिला का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के एक माह बाद भी जब उसने मामले में कार्रवाई के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की, तो उसे सहयोग मिलने के बजाय उसके चरित्र पर सवाल उठाए गए। आवेदन में दावा किया गया है उस पर उल्टा कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी गई।
महिला ने लिखा है कि वह अपने बच्चों को लेकर डरी हुई है और ऐसे माहौल में उसके लिए खुलकर आवाज उठाना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद उसने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

आवेदन ने खड़े किए कई सवाल

महिला द्वारा दिए गए आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच होना जरूरी है। सवाल यह भी है कि यदि किसी पुलिसकर्मी पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, तो मामले की जांच कितनी निष्पक्ष तरीके से होगी और शिकायतकर्ता महिला को सुरक्षा व भरोसा कौन देगा?
यह मामला केवल एक महिला की शिकायत नहीं, बल्कि वर्दी की गरिमा और पुलिस व्यवस्था में आम लोगों के भरोसे से जुड़ा सवाल भी है। आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला जांच और कानून की प्रक्रिया से ही होगा, लेकिन शिकायत में दर्ज गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच और महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। आवेदन के अंत में महिला ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर उसे न्याय दिलाने की अपील की है।

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