Thursday, September 24

झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने के साथ-साथ जरूरी मानव संसाधन की बहाली की भी योजना बनाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि वे तीन वर्षों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर एक सप्ताह के भीतर विभाग को उपलब्ध कराएं।

फैकल्टी और स्टाफ के पदों का होगा पुनर्गठन

सीटों में प्रस्तावित वृद्धि के अनुरूप मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों के पदों का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ठोस कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया गया है। गुरुवार को मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि यदि शैक्षणिक संवर्ग में चिकित्सकों की कमी होती है, तो जरूरत के अनुसार संविदा के आधार पर नियुक्तियां की जा सकती हैं।

अन्य राज्यों से भी बुलाए जाएंगे विशेषज्ञ

अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं ली जाएं और दूसरे राज्यों तथा शहरों से भी योग्य प्रोफेसरों को आमंत्रित करने की संभावनाएं तलाशी जाएं। इसके साथ ही नियुक्ति के लिए जारी होने वाले विज्ञापनों का पूरे देश में व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अन्य राज्यों से योग्य प्राध्यापकों, सह-प्राध्यापकों तथा सहायक प्राध्यापकों की सेवाएं लेने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त नियमित रूप से वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित करने की बात भी कही गई है।

धनबाद मेडिकल कॉलेज में 450 सीटें बढ़ाने का लक्ष्य

बैठक के दौरान शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद की ओर से जानकारी दी गई कि वर्ष 2030 तक की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसमें एमबीबीएस की 250 और पीजी की 200 सीटें बढ़ाने का लक्ष्य शामिल है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इस कार्ययोजना के आधार पर सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों का पुनर्गठन किया जाए। बताया गया कि राज्य के पांचों मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की योजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है।

बोकारो और चाईबासा में अगले वर्ष से शुरू हो सकती है पढ़ाई

समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ने बोकारो और चाईबासा में निर्माणाधीन नए मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की भी जानकारी ली। बताया गया कि दोनों कॉलेजों के भवन अगले वर्ष तक पूर्ण हो जाने की संभावना है। यदि आवश्यक फैकल्टी और अन्य संसाधन समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और निर्धारित मानक पूरे होते हैं, तो अगले वर्ष से इन दोनों कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।

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