रांची: बच्चों की कस्टडी और माता-पिता से मुलाकात (विजिटेशन) से जुड़े मामलों में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट की ‘चाइल्ड एक्सेस एंड कस्टडी गाइडलाइंस विद पैरेंटिंग प्लान’ को अपनाया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि माता-पिता के अलग होने या तलाक की स्थिति में बच्चों के अधिकार सुरक्षित रहें और उनके मानसिक, भावनात्मक व सामाजिक विकास पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
गाइडलाइंस में स्पष्ट कहा गया है कि कस्टडी से जुड़े हर मामले में अदालत सबसे पहले बच्चे के सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child) को प्राथमिकता देगी। माता-पिता के आपसी विवाद का असर बच्चे पर नहीं पड़ना चाहिए और बच्चे को किसी एक अभिभावक के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
शेयर्ड पैरेंटिंग और पैरेंटिंग प्लान पर जोर
नई व्यवस्था में शेयर्ड पैरेंटिंग (Shared Parenting) को बढ़ावा दिया गया है, ताकि बच्चा दोनों माता-पिता के साथ जुड़ा रहे और दोनों का प्यार व सहयोग उसे मिलता रहे। हर कस्टडी मामले में दोनों पक्षों को अदालत के समक्ष पैरेंटिंग प्लान और चाइल्ड कस्टडी एफिडेविट देना होगा। यदि दोनों पक्ष सहमत नहीं होते हैं, तो अदालत बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए स्वयं पैरेंटिंग प्लान तैयार कर सकती है।
गाइडलाइंस के अनुसार, समन जारी होने के बाद जल्द से जल्द अंतरिम विजिटेशन की व्यवस्था की जाएगी और अधिकतम तीन महीने के भीतर स्थायी विजिटेशन प्लान तैयार करने का प्रयास होगा। इससे बच्चे का दोनों माता-पिता से नियमित संपर्क बना रहेगा।
आदेश नहीं मानने पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
यदि कोई अभिभावक जानबूझकर बच्चे को दूसरे अभिभावक से मिलने से रोकता है, उसके मन में दूसरे अभिभावक के प्रति नफरत पैदा करता है या अदालत के विजिटेशन आदेश का पालन नहीं करता है, तो अदालत सख्त कदम उठा सकती है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त विजिटेशन, काउंसलिंग, जुर्माना और गंभीर स्थिति में बच्चे की कस्टडी दूसरे अभिभावक को सौंपने तक का निर्णय लिया जा सकता है।
गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि कस्टडी विवाद के दौरान लगाए गए गंभीर आरोपों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी। यदि आरोप झूठे पाए जाते हैं, तो संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही बच्चे को दोनों माता-पिता से नियमित बातचीत, उसकी पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दोनों अभिभावकों तक पहुंचाने तथा दादा-दादी समेत अन्य करीबी रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
इन गाइडलाइंस के लागू होने से झारखंड में बच्चों की कस्टडी और विजिटेशन से जुड़े मामलों के निपटारे में एक समान व्यवस्था लागू होगी। इससे मामलों का जल्द समाधान होने के साथ यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि माता-पिता के आपसी विवाद का सबसे अधिक नुकसान बच्चों को न उठाना पड़े।
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