एक भी प्रॉपर्टी कार्ड जारी नहीं, ग्रामीणों को योजना का लाभ मिलने का इंतजार
अक्षय | रांची: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत झारखंड की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है। राज्य में अधिसूचित 757 गांवों में से अब तक केवल 240 गांवों में ही ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा हो सका है। सबसे अहम बात यह है कि अब तक किसी भी गांव के लिए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार या वितरित नहीं किया गया है।
केंद्र सरकार के अनुसार, झारखंड में फिलहाल स्वामित्व योजना का कार्य केवल खूंटी जिले में चल रहा है। यहां 757 अधिसूचित गांवों में से 240 गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है, लेकिन न तो किसी गांव का रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) तैयार हुआ है और न ही ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड वितरित किए गए हैं।
झारखंड में स्वामित्व योजना की स्थिति
अधिसूचित गांव: 757
ड्रोन सर्वे पूरा: 240 गांव
जिन गांवों के प्रॉपर्टी कार्ड तैयार हुए: 0
तैयार प्रॉपर्टी कार्ड: 0
वितरित प्रॉपर्टी कार्ड: 0
देशभर में क्या है स्थिति?
केंद्र सरकार के अनुसार, देशभर में अब तक 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। वहीं 1.97 लाख गांवों के लिए 3.24 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए हैं, जिनमें से 2.72 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड ग्रामीणों को वितरित किए जा चुके हैं।
सरकार ने बताया कि स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्ति का रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) उपलब्ध कराना है, जिससे संपत्ति विवाद कम हों और ग्रामीण अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक से ऋण प्राप्त कर सकें।
संपत्ति कार्ड पर मिले ₹1,713 करोड़ के ऋण
केंद्र सरकार ने बताया कि देशभर में स्वामित्व प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर अब तक 11,147 ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल राशि ₹1,713 करोड़ है। सबसे अधिक ऋण राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और मिजोरम में दिए गए हैं। झारखंड में अभी तक प्रॉपर्टी कार्ड जारी नहीं होने के कारण इस योजना के तहत किसी भी ऋण का लाभ नहीं मिला है।
3.38 लाख गांवों को कवर करने का लक्ष्य
पंचायती राज मंत्रालय ने बताया कि योजना के तहत 3.38 लाख गांवों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। ड्रोन सर्वे और नक्शा तैयार करने का कार्य भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा किया जाता है, जबकि प्रॉपर्टी कार्ड तैयार करने, सत्यापन और वितरण की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। मंत्रालय लगातार राज्यों और सर्वे ऑफ इंडिया के साथ समन्वय कर योजना को समय पर पूरा कराने की दिशा में काम कर रहा है।
