झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की सीबीआई या स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की है। इसमें 19 अप्रैल 2026 को हुई परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने और गंभीर अनियमितताओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष व समयबद्ध जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने की मांग की गई है।
विवाद की जड़ में दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उठा वह मामला है, जिसमें एक सफल उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल हो गई थी, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए। रिपोर्टों के अनुसार आरोप है कि संबंधित उम्मीदवार ने पेपर-वन में कुल सौ में से केवल अड़तालीस सवालों के जवाब दिए थे, फिर भी उसे प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया। इसके बाद JPSC ने स्पष्ट किया था कि मामले की जांच CID कर रही है और सफल अभ्यर्थियों से पेपर-वन व पेपर-टू की OMR कार्बन कॉपियां जमा कराने को कहा गया था।
याचिका में केवल एक उम्मीदवार तक सीमित जांच के बजाय पूरी परीक्षा प्रणाली के स्वतंत्र ऑडिट की मांग की गई है। कोर्ट से यह भी अपील की गई है कि परीक्षा से जुड़े मूल OMR शीट, कार्बन कॉपियां, सीसीटीवी फुटेज और सर्वर ऑडिट लॉग जैसे डिजिटल-भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए, ताकि छेड़छाड़ की आशंका न रहे। याचिका में झारखंड में परीक्षा को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का भी हवाला है। बताया गया है कि छात्रों का विरोध प्रदर्शन 25 जुलाई से बापू वाटिका में शुरू हुआ और बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी रहा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी, जिससे राज्य के हजारों अभ्यर्थियों और युवाओं की निगाहें अब अदालत के रुख पर टिकी हैं। इससे पहले विपक्षी दल और छात्र संगठन लगातार केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग उठाते रहे हैं। सोमवार की सुनवाई इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।
