Thursday, October 15

दिल्ली के एक होटल से जुड़े विवाद को लेकर बिहार की सियासत में नया मोड़ आ गया है। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की सोशल मीडिया पोस्ट पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) मंत्री संजय कुमार सिंह ने कड़ा कानूनी रुख अपनाया है। मंत्री की ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपये की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया है।

यह नोटिस अधिवक्ता सुशील कुमार के माध्यम से भेजा गया है। बताया गया है कि नोटिस तेज प्रताप यादव के वॉट्सऐप पर भी डिलीवर हो चुका है। मंत्री की ओर से नोटिस में सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को आपत्तिजनक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है।

सात दिन में माफी और बयान वापस लेने की मांग

कानूनी नोटिस में तेज प्रताप यादव से अपने बयानों और आरोपों का खंडन करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस के मुताबिक, इसके लिए सात दिनों की समयसीमा दी गई है।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय के भीतर माफी नहीं मांगी गई और आरोपों को वापस नहीं लिया गया, तो तेज प्रताप यादव के खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का सिविल और क्रिमिनल मुकदमा दायर किया जाएगा। कानूनी कार्रवाई से जुड़े खर्च और उसके परिणाम की जिम्मेदारी भी तेज प्रताप यादव पर होने की बात नोटिस में कही गई है।

मंत्री की छवि खराब करने का आरोप

संजय कुमार सिंह की ओर से भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानबूझकर उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। नोटिस में कहा गया है कि इन आरोपों से मंत्री की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

इसी आधार पर नोटिस में 50 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है। साथ ही नोटिस में भारतीय न्याय संहिता-2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 के प्रावधानों के तहत आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

निजी जीवन से जुड़े आरोपों पर भी जवाब मांगा

नोटिस में तेज प्रताप यादव के निजी जीवन से संबंधित कई मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें उनके वैवाहिक और कथित विवाहेतर संबंधों को लेकर स्पष्टीकरण की मांग किए जाने की बात सामने आई है।

नोटिस में अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा के साथ सोशल मीडिया रील्स, कुछ युवतियों के साथ कथित संबंधों और दिल्ली-पटना से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन सभी बातों को मंत्री की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोप/दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अब इस मामले में तेज प्रताप यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर नजर बनी हुई है।

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