Wednesday, September 9

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के पीड़ितों की पहचान में तेजी लाने के लिए भारत ने अहम कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस आपदा में लापता हुए लोगों के भारत में रह रहे परिजनों को देश की केंद्रीय और राज्य स्तरीय फोरेंसिक लैब में मुफ्त डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा दी जाएगी। यह सेवा लापता व्यक्ति के माता-पिता, बच्चों या भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तेदारों के लिए उपलब्ध होगी, जो अपने बायोलॉजिकल नमूने देकर डीएनए प्रोफाइल तैयार करवा सकेंगे।

यह जांच केंद्रीय व राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, और डीएनए क्षमता वाली NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में की जाएगी।

बाढ़ से भारी तबाही

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमखंड और चट्टानें खिसकने से आई इस अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांव-कस्बे तबाह कर दिए। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक अब तक कम से कम 1290 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि करीब 5000 लोग अभी भी लापता हैं। राहत-बचाव अभियान में अब तक 12,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं।

पहचान प्रक्रिया को गति देने की कोशिश

26 अगस्त को आई इस बाढ़ के बाद काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने पहचान से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया की जानकारी पहले ही साझा कर दी थी। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत की फोरेंसिक लैब सेवाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। शवों की पहचान के लिए ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए प्रोफाइलिंग तकनीक अपनाई जा सकती है, जो नेपाली अधिकारियों की तय तकनीकी शर्तों के अनुसार होगी।

संपर्क के लिए जारी सुविधाएं

नेपाल के अधिकारियों ने सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबर +977 9841 616095 जारी किया है। नेपाल में डीएनए प्रोफाइलिंग पूरी होने के बाद तैयार रिपोर्ट को प्रारंभिक जानकारी सहित नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल आईडी dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजा जा सकता है, ताकि अज्ञात शवों से प्राप्त डीएनए नमूनों के साथ इसका मिलान किया जा सके। वहीं, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय बनाए रखने और प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए डीएनए रिपोर्ट की एक प्रति दूतावास की ईमेल आईडी eoikathmandufloodsupport@gmail.com पर भी भेजी जा सकती है।

गौरतलब है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट हिमखंड और चट्टानें खिसकने से आई इस अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों को बुरी तरह तबाह कर दिया था, जिससे इलाके में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला।

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