Wednesday, September 9

रांची: झारखंड के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जल्द ही रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट की लंबी प्रक्रिया से राहत मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग अब अस्पतालों की सेवाओं को ज्यादा से ज्यादा डिजिटल करने की दिशा में काम कर रहा है। योजना के तहत मोबाइल के जरिए अस्पताल आने से पहले ही मरीजों को जरूरी सुविधाओं से जोड़ने और ऑनलाइन प्रक्रियाओं का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीडेक सॉफ्टवेयर को अधिक सुविधाजनक और प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है। इसी सिलसिले में सोमवार को रिम्स में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एच. बिरुआ, डॉ. शैलेश त्रिपाठी, डॉ. एके झा और सीडेक के विशेषज्ञ शामिल हुए।

स्वास्थ्य संयुक्त सचिव सह ABDM के झारखंड नोडल अधिकारी दिनेश कुमार यादव ने बताया कि विभाग का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक से अधिक ऑनलाइन करना है। इसके जरिए मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही मोबाइल के माध्यम से जरूरी सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट के साथ मरीजों से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर काम हो रहा है।

रिम्स और सदर अस्पताल से शुरू हुआ प्रयोग

डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में झारखंड में काम पहले ही शुरू हो चुका है। रिम्स और सदर अस्पताल में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की सुविधा उपलब्ध है। अब स्वास्थ्य विभाग की कोशिश इस सुविधा को ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुंचाने की है।

इसके लिए विभाग सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने की तैयारी कर रहा है, ताकि लोगों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की सुविधा के बारे में जानकारी मिले और ज्यादा से ज्यादा मरीज इसका इस्तेमाल कर सकें।

बैठक के दौरान डॉक्टरों के पास मरीजों की संख्या और उनके समय को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने को लेकर भी चर्चा हुई। विभाग का उद्देश्य मरीजों के इंतजार के समय को कम करने के साथ अस्पतालों में मौजूद संसाधनों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करना है।

जिला अस्पतालों और CHC तक पहुंचेगा सीडेक

फिलहाल डिजिटल व्यवस्था को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग की योजना सीडेक सॉफ्टवेयर को चरणबद्ध तरीके से राज्य के सभी जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) तक लागू करने की है।

हालांकि, इसे लागू करने से पहले सॉफ्टवेयर में जरूरी सुधार और बदलाव किए जा रहे हैं। अधिकारियों और डॉक्टरों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर इसमें और सुधार किया जाएगा। विभागीय स्तर पर किए जाने वाले बदलावों को बाद में दूसरे अस्पतालों में भी लागू करने की योजना है।

इससे आने वाले समय में राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक समान व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकेगा।

कागज और भीड़ कम करने पर जोर

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पतालों में डिजिटल व्यवस्था मजबूत होने से कागजी कामकाज और अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सकता है। इसका सीधा फायदा मरीजों को मिल सकता है। साथ ही अस्पतालों में संक्रमण के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

विभाग की यह पहल केंद्र सरकार के आयुष्मान भारत के डिजिटल हेल्थ विजन के अनुरूप भी है। अधिकारियों के मुताबिक लक्ष्य सिर्फ एक सॉफ्टवेयर को अस्पतालों में लागू करना नहीं है, बल्कि उसे लगातार अपग्रेड करते हुए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए अस्पताल में कम से कम समय बिताना पड़े।

मोबाइल से जुड़ेंगी अस्पताल की सेवाएं

स्वास्थ्य विभाग की मौजूदा योजना से आने वाले समय में मोबाइल आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ने की तस्वीर सामने आती है। रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट जैसी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और आसान बनाने के साथ मरीजों को घर से ही अस्पताल की सेवाओं से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

अब विभाग के सामने दोहरी चुनौती है – एक तरफ सीडेक सॉफ्टवेयर को जरूरत के मुताबिक बेहतर बनाना और दूसरी तरफ आम लोगों को ऑनलाइन सुविधा के इस्तेमाल के लिए जागरूक करना। इसी वजह से तकनीकी सुधार के साथ इसके प्रचार-प्रसार पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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