Friday, October 2

पलामू: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया था कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था अब पटरी पर आ गई है। लेकिन पलामू में सामने आई एक कार्रवाई इस दावे से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाती है। विश्रामपुर के सोरडीहा स्थित राहत अस्पताल में डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों का इलाज और मेडिकल जांच चल रही थी। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड को लेकर भी नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया। जांच के बाद प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया।

आखिर यह कैसी स्वास्थ्य व्यवस्था है, जहां मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन डॉक्टर ही मौजूद नहीं हैं?

डॉक्टर नहीं थे, फिर भी चल रहा था इलाज…

सदर एसडीओ संजय कुमार पांडेय ने राहत अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान डॉक्टर मौके पर नहीं मिले, जबकि मरीजों का इलाज और मेडिकल जांच की जा रही थी। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड संचालन को लेकर भी अनियमितता सामने आई।

प्रशासन ने मौके की वीडियोग्राफी कराई और जरूरी साक्ष्य जुटाए। इसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया। मामले में विश्रामपुर थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।

यानी जिस अस्पताल में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे थे, वहां इलाज तो चल रहा था, लेकिन डॉक्टर की मौजूदगी ही नहीं थी। ऊपर से अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सुविधा भी नियमों के सवालों में आ गई।

सोशल मीडिया और जमीनी हकीकत में कोसो का फासला…

इरफान अंसारी सोशल मीडिया के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था के पटरी पर आने की बात कहते हैं। दूसरी ओर पलामू का यह मामला बता रहा कि जमीन पर तस्वीर अभी भी कितनी अलग  है।

किसी अस्पताल में डॉक्टर मौजूद है या नहीं, मरीजों का इलाज कौन कर रहा है और जांच की सुविधाएं नियमों के मुताबिक चल रही हैं या नहीं – ये ऐसी बुनियादी चीजें हैं, जिनकी निगरानी स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षित है।

अस्पताल सील…

पलामू में इससे पहले भी निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जांच के दौरान कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में मामला सिर्फ राहत अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित निगरानी पर भी ध्यान खींच रहा है।

मरीज जब अस्पताल जाता है तो उसे यह भरोसा होता है कि वहां डॉक्टर होगा, इलाज तय नियमों के मुताबिक होगा और जांच सुरक्षित तरीके से की जाएगी। लेकिन अगर डॉक्टर के बिना ही इलाज शुरू हो जाए और अल्ट्रासाउंड भी नियमों के घेरे में आ जाए, तो फिर स्वास्थ्य व्यवस्था के पटरी पर होने का दावा स्वाभाविक तौर पर सवालों के घेरे में है।

पलामू की यह कार्रवाई एक अस्पताल पर ताला लगाने की कहानी भर नहीं है। यह मंत्री जी के उस दावे के सामने खड़ी जमीनी तस्वीर भी है, जिसमें कहा गया था कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर आ गई है।

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