Wednesday, October 14

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से जारी आंदोलन को फिलहाल दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। छात्रों ने सरकार को 60 दिनों का समय दिया है। वहीं, दूसरी तरफ JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों का विरोध अभी भी जारी है।

60 दिन का समय, फिर शुरू होगा आंदोलन

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों ने कहा है कि सरकार को अब 60 दिनों का समय दिया जा रहा है। इस दौरान अगर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की CBI जांच नहीं कराई गई, तो छात्र दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे।

छात्रों का कहना है कि आंदोलन को खत्म नहीं किया गया है, बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है। सरकार के अगले कदम पर उनकी नजर रहेगी।

 

पिछले कई दिनों से छात्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इसी दौरान कई छात्रों ने अनशन भी किया था।

CGL अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी

दूसरी ओर JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों ने अपना विरोध खत्म नहीं किया है। परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले के खिलाफ अभ्यर्थी लगातार धरना दे रहे हैं।

प्रोजेक्ट भवन के गेट के अंदर घुसे प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आक्रोश अब बढ़ता जा रहा है। छात्रों ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर लगी बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और गेट के अंदर प्रवेश कर गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की व बहस हुई। इसके बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते हुए अपना विरोध जता रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

कई अभ्यर्थी भावुक होकर जमीन पर लेट गए और रोते हुए न्याय की गुहार लगाई। स्थिति को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है छात्रो ने सरकार से मांग की कि परीक्षा रद्द करने के बजाय उन्हें नौकरी दी जाए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने “नौकरी दो या फांसी दो” जैसे नारे लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा पास की, नौकरी मिली और अब सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले से उनका भविष्य संकट में आ गया है। जब तक JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी यह भी कह रहे हैं कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना इतना बड़ा फैसला लिया है। उनका कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच हो, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

अब सरकार के सामने दो बड़ी चुनौती

एक तरफ JPSC-JSSC सुधार मंच ने सरकार को 60 दिन का समय देकर फिलहाल आंदोलन रोक दिया है। दूसरी तरफ CGL के सफल अभ्यर्थी अपने फैसले पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

यानी सरकार के सामने अब दो अलग-अलग मांगें और दो तरह की परिस्थितियां हैं। एक समूह परीक्षा व्यवस्था में सुधार और CBI जांच की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा समूह CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग पर अड़ा है।

अब सवाल यही है कि अगले 60 दिनों में सरकार इन मांगों का कितना समाधान कर पाती है? क्या CBI जांच की मांग पर कोई फैसला होगा? क्या CGL अभ्यर्थियों को भी सरकार की ओर से कोई रास्ता मिलेगा?

क्योंकि एक आंदोलन फिलहाल थम गया है, लेकिन दूसरा जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड का यह छात्र आंदोलन आखिर किस मोड़ पर पहुंचेगा, यह देखने वाली बात होगी।

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