जामताड़ा। देश भर में साइबर ठगी के गढ़ के रूप में कुख्यात रहे जामताड़ा जिले में पुलिस ने एक बार फिर संगठित साइबर अपराध नेटवर्क पर करारा प्रहार किया है. शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह ने बताया कि विशेष अभियान चलाकर नौ साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से भोले-भाले लोगों को ठगने का धंधा चला रहे थे.
गुप्त सूचना पर हुई समन्वित छापेमारी
एसपी सिंह के अनुसार, यह कार्रवाई विश्वसनीय गुप्त सूचना के आधार पर की गई. साइबर डीएसपी अमित रविदास की अगुवाई में गठित एक विशेष टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी. करमाटांड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सियारसोल और मटटांड़ गांवों के साथ-साथ जामताड़ा थाना क्षेत्र के मोहड़ा-पोसोई इलाके में भी छापेमारी की गई. इस संयुक्त अभियान में करमाटांड़ क्षेत्र से पांच और जामताड़ा क्षेत्र से चार, कुल नौ आरोपियों को हिरासत में लिया गया. इस मामले में साइबर थाने में कांड संख्या 44/26 (17 जुलाई 2026) दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और दूरसंचार अधिनियम-2023 की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.
किन-किन को किया गया गिरफ्तार
पकड़े गए आरोपियों में करमाटांड़ थाना क्षेत्र के मटटांड़ गांव निवासी मुजाहिद अंसारी (24), सलामत अंसारी (27), समनर अंसारी (33), तबारक अंसारी (25) और सरफराज अंसारी (30) शामिल हैं. वहीं जामताड़ा थाना क्षेत्र के पोसोई गांव से रोकी कुमार दास (23), अर्जुन दास (37) और सचिन दास (23) को गिरफ्तार किया गया. इनके अलावा पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के कुल्टी थाना क्षेत्र स्थित बराकर के दासपाड़ा मोहल्ले का निवासी अमृत रूईदास (24) भी इस गिरोह में शामिल पाया गया.
बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से भारी मात्रा में साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले उपकरण मिले. पुलिस ने कुल 27 मोबाइल फोन, 39 सिम कार्ड और एक टैबलेट जब्त किया है. जांच अधिकारियों का कहना है कि इन उपकरणों के जरिए ही गिरोह फर्जी कॉल और मैसेज कर लोगों को झांसे में लेता था. जब्त सभी उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क और अब तक की गई ठगी की रकम का पता लगाया जा सके.
कैशबैक का लालच और फर्जी बैंक अधिकारी बनकर ठगी
एसपी ने ठगी के तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि गिरोह के सदस्य लोगों को फोनपे कैशबैक मिलने का प्रलोभन देकर संपर्क करते थे. जैसे ही कोई व्यक्ति कैशबैक स्वीकार करने का अनुरोध मंजूर करता, उसके बैंक खाते से रकम आरोपियों के फर्जी ई-वॉलेट खातों में स्थानांतरित हो जाती थी. इसके अतिरिक्त गिरोह के सदस्य खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों से एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते थे, और इसी जानकारी के सहारे उनके खातों से अवैध रूप से पैसे निकाल लेते थे.
एक आरोपी कर रहा था वकालत की तैयारी, बाद में जुड़ा गिरोह से
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल अमृत रूईदास की कहानी खासी चौंकाने वाली है. पुलिस के मुताबिक वह अपने ससुराल पोसोई में रहकर वकालत की पढ़ाई की तैयारी कर रहा था. प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि पढ़ाई के दौरान ही वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे इस गिरोह का हिस्सा बन गया. पुलिस अब उसकी संलिप्तता की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि वह गिरोह में किस स्तर पर सक्रिय था.
दो आरोपी पहले से भी दर्ज हैं साइबर अपराध के मामलों में
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के दो सदस्यों का आपराधिक इतिहास पुराना है. मुजाहिद अंसारी के विरुद्ध पहले भी साइबर थाना कांड संख्या 44/24 में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है, जबकि सलामत अंसारी के खिलाफ कांड संख्या 59/20 में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. इससे स्पष्ट होता है कि जिले में साइबर अपराधियों का एक स्थायी और बार-बार सक्रिय होने वाला नेटवर्क मौजूद है.
पुलिस की जनता से अपील
प्रेस वार्ता के दौरान साइबर डीएसपी अमित रविदास और साइबर थाना प्रभारी राजेश मंडल सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. एसपी शंभू कुमार सिंह ने आम जनता से अपील की कि वे किसी भी अनजान नंबर से आए कॉल, कैशबैक के प्रलोभन या बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की संदिग्ध साइबर गतिविधि दिखने पर तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें, ताकि समय रहते ऐसे अपराधों पर लगाम कसी जा सके.
