Friday, October 2

झारखंड की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सुधार की माँग एक बार फिर सड़क की ओर बढ़ती दिख रही है। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में राज्य सरकार को चेताया कि 18 अक्टूबर 2026 तक उसकी माँगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्यव्यापी ‘छात्र महापंचायत’ बुलाई जाएगी। मंच के अनुसार इसी महापंचायत में आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी।

“सरकार का रवैया उदासीन”

मंच का आरोप है कि सुधार के मुद्दे पर सरकार का रुख उदासीन है। विज्ञप्ति में कुणाल प्रताप के हवाले से कहा गया है कि परीक्षाओं में सुधार से जुड़ी “जायज माँगें” 18 अक्टूबर तक पूरी न होने पर छात्र महापंचायत बुलाई जाएगी।

मंच के प्रवक्ता पीयूष कुमार ने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं का भविष्य इस समय दाँव पर है। उनके मुताबिक 26 दिन चले आंदोलन के बाद छात्रों ने इस आश्वासन पर आंदोलन स्थगित किया था कि दो महीने के भीतर सुधार से जुड़े सभी कार्य पूरे कर लिए जाएँगे। पीयूष कुमार का दावा है कि मौजूदा हालात में इस दिशा में सरकार की सक्रियता नज़र नहीं आती। उन्होंने कहा कि छात्र नियुक्तियों के अवसर की उम्मीद लगाए बैठे हैं और समय-सीमा बीतने पर मंच चुप नहीं बैठेगा।

मंच के प्रवक्ता रवींद्र पासवान ने कहा कि मंच के नेतृत्व में राज्य के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और कमज़ोर चयन प्रक्रिया के ख़िलाफ़ लंबी लड़ाई लड़ी है। उनके अनुसार यह आक्रोश युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए है। मंच ने सरकार से अपील की है कि वह युवाओं के धैर्य की परीक्षा न ले और परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता के लिए समय रहते कड़े कदम उठाए।

मंच की 11 माँगें

विज्ञप्ति में सुधार से जुड़ी माँगों और सुझावों को 11 बिंदुओं में रखा गया है। इन्हें मोटे तौर पर चार हिस्सों में समझा जा सकता है।

1. आयोगों की स्वायत्तता और ढाँचा

  • परीक्षा की पूरी प्रक्रिया आउटसोर्सिंग एजेंसी के बिना JPSC और JSSC स्वयं संपन्न कराएँ। इसके लिए दोनों आयोगों को भौतिक, आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त किया जाए।
  • दोनों आयोगों में अध्यक्ष और सदस्य पदों पर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों और उनके रिश्तेदारों की नियुक्ति न हो। केवल गैर-राजनीतिक और बेदाग छवि वाले लोग ही इन पदों पर बैठाए जाएँ।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए कठोर और व्यापक कानून, नियम तथा SOP बनें, और SOP सार्वजनिक किया जाए।

2. परिणाम, अंक और उत्तर पुस्तिकाओं में पारदर्शिता

  • हर चरण के परिणाम के साथ कटऑफ अंक जारी हों। अंतिम परिणाम के साथ मूल और नॉर्मलाइज़्ड, दोनों अंकों वाला स्कोर कार्ड दिया जाए।
  • नॉर्मलाइज़ेशन की स्थिति में उसकी प्रक्रिया और फ़ॉर्मूला सार्वजनिक किया जाए।
  • JPSC प्रारंभिक परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों की OMR शीट और मुख्य परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों की कॉपियाँ तय समय-सीमा में JPSC के ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएँ।
  • JPSC की सभी मुख्य परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएँ मैन्युअल तरीके से जाँची जाएँ और जाँची गई कॉपी अभ्यर्थी की OTR ID में डिजिटल रूप से अपलोड की जाए।
  • प्रारंभिक या OMR आधारित परीक्षाओं में विकल्प ‘E’ के रूप में “उत्तर नहीं देना चाहता” का विकल्प दिया जाए। कोई प्रश्न छोड़ने की स्थिति में अभ्यर्थी के लिए इसे चुनना अनिवार्य हो।

3. अभ्यर्थियों की सुविधा और संवाद

  • दोनों आयोगों में अभ्यर्थियों के लिए तत्पर और संवेदनशील हेल्प डेस्क प्रणाली विकसित की जाए।
  • परीक्षा से जुड़े किसी विवाद या परीक्षा प्रणाली में बदलाव की स्थिति में संबंधित आयोग प्रेस विज्ञप्ति या प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिये सूचना दे।

4. लंबित परीक्षाएँ, आयु सीमा और शारीरिक मानक

  • जिन परीक्षाओं को रद्द करने का प्रस्ताव है, उनके साथ अन्य सभी लंबित परीक्षाओं (JSSC आशुलिपिक, LDC, पुलिस, दारोगा आदि) की अधिसूचना परीक्षा कैलेंडर सहित जल्द जारी की जाए। तय समय-सीमा में पारदर्शी ढंग से परीक्षा पूरी होने की गारंटी भी दी जाए।
  • आयु सीमा में छूट के तहत JPSC में आयु कटऑफ 2018 के आधार पर तय हो और JSSC में अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष निर्धारित की जाए।
  • दारोगा और सिपाही परीक्षा की 1.6 किलोमीटर की दौड़ के लिए पुरुषों को 7 मिनट और महिलाओं को 11 मिनट का समय दिया जाए।
  • उत्पाद सिपाही परीक्षा में मृत छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाए।

अब निगाहें 18 अक्टूबर पर

अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार मंच ने सरकार को 18 अक्टूबर तक का समय दिया है। विज्ञप्ति में सरकार या दोनों आयोगों की ओर से कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। मंच ने कहा है कि समय-सीमा बीतने के बाद छात्र महापंचायत के ज़रिये पूरे राज्य के छात्र एकजुट होकर आगे की रणनीति तय करेंगे।

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