Tuesday, September 22

विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग देने की जरूरत है। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में राज्य के आर्थिक हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं, जिनमें खनन पर सेस लगाने का अधिकार बहाल करना, जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई और जी-राम-जी योजना में 90:10 के अनुपात को फिर से लागू करना शामिल है।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18 और 19 सितंबर को “विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण” विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल हुए।

विकसित भारत के लिए पिछड़े राज्यों को सहयोग जरूरी

सम्मेलन को संबोधित करते हुए राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ एक ऐसा समाज बनाना जरूरी है, जिसमें आर्थिक और सामाजिक रूप से सभी वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय, GDP, विनिर्माण उत्पादन और दूसरे वित्तीय आंकड़े तभी मायने रखते हैं, जब देश की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति में भी सुधार दिखाई दे। उनके मुताबिक विकसित भारत के निर्माण में आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता और पर्याप्त सहयोग देना जरूरी है।

जाति-धर्म के आधार पर विभाजन पर जताई चिंता

वित्त मंत्री ने देश में जाति और धर्म के आधार पर बढ़ते विभाजन को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह का विभाजन देश के समग्र विकास के रास्ते में बाधा बन सकता है।

उन्होंने भारत की प्रति व्यक्ति आय और आय के असमान वितरण को भी बड़ी चुनौती बताया। नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी कम करने के प्रयासों को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

गांव और कृषि क्षेत्र में बढ़े निवेश पर जोर

राधाकृष्ण किशोर ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। कहा कि देश की करीब 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जबकि खेती का बड़ा हिस्सा अब भी बारिश पर निर्भर है।

ऐसे में सिंचाई व्यवस्था के विस्तार के साथ दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में वित्तीय निवेश बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी निवेश को प्राथमिकता देने की बात कही।

झारखंड को 20 से 22 हजार करोड़ की संभावित आर्थिक क्षति का दावा

झारखंड की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्य को करीब 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है।

खनिज क्षेत्र से जुड़े संशोधनों और कर नीतियों का असर राज्य के राजस्व पर पड़ा है। इसके बावजूद उन्होंने झारखंड की वित्तीय स्थिति से जुड़ी उपलब्धियों को भी सामने रखा।

वित्तीय उपलब्धियों का भी किया जिक्र

झारखंड नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखा गया है और पूंजीगत व्यय भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।

केंद्र के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें

अपने संबोधन के अंत में राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार के सामने झारखंड के हितों से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें रखीं-

  • खनन पर सेस लगाने का अधिकार फिर से बहाल किया जाए।
  • जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई की जाए।
  • जी-राम-जी योजना में 90:10 का अनुपात फिर से लागू किया जाए।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों को मजबूत किए बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। उनके मुताबिक राज्यों की वित्तीय और आर्थिक क्षमता बढ़ने से ही देश के विकास को और गति मिल सकती है।

सम्मेलन में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल भी रहा मौजूद

सम्मेलन में झारखंड की ओर से वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी, चन्द्रभूषण प्रसाद, संयुक्त सचिव अनिरबान आईच, मंत्री के आप्त सचिव नरेन्द्र कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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