रांची: झारखंड की बहुचर्चित JSSC-CGL भर्ती परीक्षा को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। भाजपा ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र CBI जांच कराने की मांग दोहराई है।
भाजपा नेताओं का दावा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी बताए जाने वाले विनोद सिंह के ठिकाने से कथित रूप से JSSC-CGL परीक्षा के एडमिट कार्ड बरामद हुए थे। भाजपा का कहना है कि यदि यह दावा सही है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड किसी निजी व्यक्ति के ठिकाने तक कैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष थी, तो सरकार को स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में जवाब देने के बजाय जांच से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा हुआ है और ऐसे में किसी भी तरह के संदेह को दूर करने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे स्वयं CBI जांच की अनुशंसा करनी चाहिए।
भाजपा ने कहा कि JSSC-CGL परीक्षा को लेकर पहले भी अभ्यर्थियों ने कई अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और मामले को लेकर न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया गया है। ऐसे में अब कथित तौर पर एडमिट कार्ड मिलने का मामला सामने आने के बाद पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच और भी जरूरी हो गई है।
हालांकि, इस मामले में सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल, JSSC-CGL परीक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
