फर्जीवाड़ा, गायब दस्तावेज और संदिग्ध डिग्रियां — जानिए क्या है झारखंड महिला पर्यवेक्षिका भर्ती का पूरा सच
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित ‘महिला पर्यवेक्षिका (Female Supervisor) भर्ती परीक्षा’ एक बार फिर विवादों और सुर्खियों के घेरे में आ खड़ी हुई है। सरकारी नौकरियों की आस लगाए बैठे प्रदेश के लाखों योग्य एवं मेधावी युवाओं के भविष्य के साथ किस तरह का खेल खेला जा रहा है, इसका एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस भर्ती परीक्षा के नतीजों और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया के दौरान एक ही विश्वविद्यालय राधा गोविंद यूनिवर्सिटी (यूनिवर्सिटी) से उत्तीर्ण 33 अभ्यर्थियों के चयन ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति द्वारा तैयार की गई शुरुआती जांच रिपोर्ट में ऐसे कई चौंकाने वाले तथ्य और अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्होंने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। गायब फीस रसीदें, हाजिरी (अटेंडेंस रजिस्टर) में नाम न होना और संदिग्ध शैक्षणिक डिग्रियों के इस जाल ने अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) तक हलचल बढ़ा दी है।
क्या है पूरा मामला ?
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने राज्य में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत महिला पर्यवेक्षिका के पदों पर बहाली के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत राज्य भर से हजारों महिला उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। परीक्षा का आयोजन होने के बाद जब सफल उम्मीदवारों की सूची और उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का मिलान शुरू हुआ, तब एक बेहद संदिग्ध पैटर्न सामने आया।
जांच के दौरान यह पाया गया कि महिला पर्यवेक्षिका पद पर अंतिम रूप से चयनित या अग्रिम सूची में शामिल 33 अभ्यर्थियों की स्नातक/अकादमिक डिग्रियां एक ही विश्वविद्यालय से निर्गत (इश्यू) की गई हैं। एक ही परीक्षा और एक ही विशिष्ट विभाग के लिए एक ही निजी/गैर-पारंपरिक यूनिवर्सिटी से इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का चयन होना अपने आप में कई शंकाओं को जन्म देता है।
जांच रिपोर्ट में हुए बड़े और चौंकाने वाले खुलासे
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जब संबंधित विश्वविद्यालय और अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की अंदरूनी जांच की गई, तो रिपोर्ट में कई ऐसी गड़बड़ियां सामने आईं, जो सीधे तौर पर एक संगठित ‘डिग्री स्कैम’ या फर्जीवाड़े की ओर इशारा करती हैं:
फीस रसीदों का गायब होना:
नियमों के मुताबिक, किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से लेकर परीक्षा देने और डिग्री प्राप्त करने तक की सभी मदों (एडमिशन फीस, ट्यूशन फीस, एग्जाम फीस) की आधिकारिक रसीदें और वित्तीय रिकॉर्ड होना अनिवार्य है। लेकिन जांच के दौरान इन 33 अभ्यर्थियों में से अधिकांश की फीस भुगतान संबंधी रसीदें या तो पूरी तरह गायब पाई गईं या उनका रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी के खाते से मेल नहीं खाया।
अटेंडेंस रजिस्टर से नाम लापता:
अकादमिक सत्र के दौरान कक्षाओं और परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की उपस्थिति (अटेंडेंस) का कोई ठोस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। छात्र-छात्राओं के रोल नंबर और अटेंडेंस शीट में भारी गड़बड़ियां मिली हैं, जिससे यह आशंका बलवती हो गई है कि ये अभ्यर्थी कभी नियमित या वैध रूप से उस विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने गए ही नहीं थे।
बैकडेट में डिग्रियां जारी करने का संदेह:
जांच अधिकारियों का मानना है कि JSSC की महिला पर्यवेक्षिका भर्ती परीक्षा की शैक्षणिक योग्यताओं की शर्तों (जैसे होम साइंस, सोशियोलॉजी या साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन) को पूरा करने के लिए बैकडेट (पुरानी तारीखों) में डिग्रियों का जुगाड़ किया गया या फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए गए।
एक ही यूनिवर्सिटी से 33 चयन: इत्तेफाक या सोची-समझी साजिश?
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और छात्र संगठनों ने इस खुलासे के बाद जोरदार विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब राज्य भर के प्रतिष्ठित सरकारी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्र दिन-रात मेहनत करके परीक्षा देते हैं, तब किसी एक अनाम या संदिग्ध यूनिवर्सिटी से अचानक 33 अभ्यर्थियों का एक साथ चुना जाना केवल एक “संयोग” या “इत्तेफाक” नहीं हो सकता।
छात्र संगठनों का आरोप है कि राज्य में ‘डिग्री माफिया’ और सॉल्वर गिरोह सक्रिय हैं, जो मोटी रकम लेकर रातों-रात शैक्षणिक डिग्रियां मुहैया कराते हैं और बाद में सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी की सूची में शामिल करवा देते हैं।
अब यूजीसी (UGC) के पाले में गेंद: कार्रवाई का इंतजार
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सबकी निगाहें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और राज्य सरकार की भावी कार्रवाई पर टिकी हैं।
यूनिवर्सिटी की मान्यता पर खतरा: यदि UGC और राज्य स्तरीय जांच टीम की अंतिम रिपोर्ट में यह साबित हो जाता है कि संबंधित विश्वविद्यालय ने नियमों को ताक पर रखकर फर्जी या बिना रिकॉर्ड की डिग्रियां बांटी हैं, तो उस यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ आपराधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो सकती है।
चयनित उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द होने के आसार: संदिग्ध डिग्रियों के आधार पर चयनित सभी 33 उम्मीदवारों की नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है या उन्हें रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके साथ ही गलत जानकारी देने के आरोप में इन अभ्यर्थियों को भविष्य की परीक्षाओं से डिबार (निष्कासित) भी किया जा सकता है।
छात्रों की मांग: उच्चस्तरीय जांच (CBI या उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज से) हो
झारखंड के युवाओं और अभ्यर्थियों ने सरकार और JSSC से मांग की है कि:
महिला पर्यवेक्षिका भर्ती परीक्षा के सभी चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की गहनता से एसआईटी (SIT) बनाकर जांच कराई जाए।
फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने की कोशिश करने वाले अभ्यर्थियों और उन्हें डिग्री बेचने वाले विश्वविद्यालय प्रबंधन पर धोखाधड़ी (IPC/BNS की संगीन धाराओं) के तहत कड़ी कार्रवाई हो।
परीक्षा परिणाम और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए ताकि मेधावी और ईमानदार छात्रों का हक न मारा जाए।
JSSC महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में सामने आया यह ‘डिग्री का खेल’ केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शी बहाली प्रक्रिया पर एक बड़ा धब्बा है। यदि जांच में यह सच साबित होता है, तो यह उन हजारों मेहनती अभ्यर्थियों के साथ बहुत बड़ा न्याय होगा जो सालों से ईमानदारी से तैयारी कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि JSSC और UGC इस जांच रिपोर्ट के आधार पर कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करते हैं।
