रांची/बुंडू: NGT की रोक है, तारीखें तय हैं और नियम भी साफ हैं…फिर भी अगर नदी घाटों पर जेसीबी गरजती मिले, ट्रैक्टर बालू ढोते नजर आएं और रात के अंधेरे में हाइवा सड़क पर दौड़ते मिलें, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बुंडू में नियम चल रहे हैं या ‘रेत का अपना सिस्टम’? दरअसल रांची DMO साहब ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है अब वह पट्टी कपड़े की है या नो…. की यह उनका काम बता रहा है। अवैध खनन, बालू के अवैध ढुलाई को लेकर रांची के हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को लग रहा है कि रांची DC मंजूनाथ भजंत्री और रांची SSP राकेश रंजन को अब खुद सड़कों पर उतर कर अवैध कार्य रोकने होंगे क्योंकि अधिनस्थ पदाधिकारियों ने पूरी तरह से सिस्टम को फेलियोर कर दिया है. जबकि कि रांची DC मंजूनाथ भजंत्री और रांची SSP राकेश रंजन पूरी तरह नो टोलरेंस के सिद्धांतों पर चल रहे हैं.
बुंडू अनुमंडल क्षेत्र में अवैध बालू उत्खनन और परिवहन को लेकर ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है। आजसू पार्टी के वरीय उपाध्यक्ष राजकिशोर कुशवाहा ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में दावा किया गया है कि 10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू उत्खनन पर NGT की रोक के बावजूद बुंडू क्षेत्र के कई नदी घाटों पर बालू का अवैध उठाव जारी है। शिकायत में बालू के अवैध कारोबार के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की भूमिका और संरक्षण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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रोक लगी थी नदी पर, लेकिन जेसीबी की ‘ड्यूटी’ जारी
शिकायत में बादला, तुंजू, सुटीलोंग, बुड़ाडीह, पांगुरा, करम्बू और कांची नदी के विभिन्न घाटों का उल्लेख किया गया है।
आरोप है कि इन घाटों पर सीधे नदी से जेसीबी के जरिए बालू निकाला जा रहा है। इसके बाद ट्रैक्टरों के जरिए बालू को घाटों से बाहर पहुंचाया जाता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि दिन में उठाव और परिवहन के बाद रात में बालू को हाइवा में लोड कर रांची-जमशेदपुर मार्ग की ओर भेजा जाता है।
जब बालू उठाव पर रोक है तो नदी घाटों तक जेसीबी पहुंची कैसे? ट्रैक्टरों की कतार लगी तो किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी? और रात में हाइवा निकलते रहे तो रास्ते में जिम्मेदार विभागों की आंखें आखिर कब खुलेंगी?
2025 की तस्वीरों से लेकर अगस्त 2026 तक के दावे
शिकायत में सिर्फ मौजूदा स्थिति का जिक्र नहीं है, बल्कि पिछले साल के अवैध उत्खनन के साक्ष्य होने का भी दावा किया गया है।
पत्र के अनुसार, 12 अक्टूबर 2025 को बादला घाट पर सीधे जेसीबी से बालू निकाले जाने की तस्वीरें आवेदन के साथ संलग्न की गई हैं। वहीं, शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस साल भी 23 और 24 अगस्त 2026 को कांची नदी के विभिन्न घाटों से कथित अवैध बालू उठाव जारी रहा।
यानी शिकायत के मुताबिक मामला एक-दो दिन की गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे बालू कारोबार की ओर इशारा करता है।
‘बालू सिंडिकेट’ निभा रहे अहम भूमिका
शिकायत में स्थानीय स्तर पर सक्रिय बताए जा रहे बालू सिंडिकेट को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र में आनंद साहू उर्फ विक्की का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि वह बालू कारोबार की गतिविधियों की देखरेख करता है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि बालू लदे वाहनों से अवैध रकम की वसूली की जाती है और यह पैसा पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है।
रात के अंधेरे में ‘रेत का खेल’, कहां है प्रशासन ?
प्रशासन भी मजे में ?
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू स्थानीय प्रशासन की भूमिका को लेकर लगाया गया आरोप है।
शिकायत में बुंडू एसडीपीओ ओमप्रकाश कुमार के संरक्षण में बालू कारोबार फलने-फूलने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि कुछ सफेदपोश लोगों की संलिप्तता हो सकती है। अगर शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल अवैध बालू खनन का मामला नहीं रहेगा।
चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी की संपत्ति पर भी जांच की मांग
शिकायत में आनंद साहू की संपत्ति और आय के स्रोतों की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। आनंद साहू बुंडू कॉलेज में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी यानी चपरासी के पद पर कार्यरत है। शिकायतकर्ता ने उसकी संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों की जांच कराने की मांग की है। सवाल यह उठाया गया है कि उसकी आय और संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या है और क्या उसकी घोषित आय के अनुरूप उसकी संपत्ति है।
‘सिस्टम’ की जानकारी के बिना इतना बड़ा कारोबार कैसे?
बुंडू क्षेत्र में जेसीबी से नदी की खुदाई हो रही हो, सैकड़ों ट्रैक्टर बालू लेकर निकल रहे हों और रात में हाइवा के जरिए बालू दूसरे इलाकों तक पहुंच रहा हो, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि इतने बड़े स्तर का कारोबार क्या स्थानीय प्रशासन की जानकारी के बिना चल सकता है?
यही वह सवाल है जिसने पूरे मामले को सिर्फ अवैध बालू उठाव से आगे बढ़ाकर प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल तक पहुंचा दिया है।
क्योंकि नदी में एक छोटी नाव दिख जाए तो प्रशासन को पता चल जाता है, सड़क पर बिना कागज का वाहन दिख जाए तो कार्रवाई हो सकती है, फिर अगर नदी घाटों पर जेसीबी और ट्रैक्टरों की आवाजाही हो रही है तो निगरानी व्यवस्था कहां है?
आजसू नेता ने मांगी हाईलेवल जांच
आजसू पार्टी के वरीय उपाध्यक्ष राजकिशोर कुशवाहा ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केवल बालू उठाने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संरक्षण, अवैध वसूली, सिंडिकेट और इसमें किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
अब गेंद जांच के पाले में है। देखना यह होगा कि जांच सिर्फ नदी के घाट तक जाती है या फिर उस ‘सिस्टम’ तक भी पहुंचती है, जिसके संरक्षण के आरोप इस शिकायत ने लगाए हैं।
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