रांची। शहर में अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई के बीच अब रांची नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विज्ञापन एजेंसियों का आरोप है कि निगम अवैध होर्डिंग्स हटाने के साथ-साथ उन होर्डिंग्स पर भी कार्रवाई कर रहा है, जिन्हें पूर्व में निगम से अनुमति मिली है और जिनके लिए एजेंसियां वर्षों से लाइसेंस शुल्क समेत निर्धारित राजस्व का भुगतान करती आ रही हैं।
विज्ञापन एजेंसियों की ओर से आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि अगर किसी होर्डिंग को निगम ने अनुमति दी, लाइसेंस दिया और उससे वर्षों तक राजस्व लिया, तो बाद में उसी होर्डिंग को बिना स्पष्ट जांच और कारण के अवैध बताकर कार्रवाई कैसे की जा सकती है? एजेंसियों ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए निगम से अपनी नियमावली और कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया बताने की मांग की है।
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कोर्ट के आदेश का हवाला, लेकिन लागू कैसे हो रहा नियम?
विज्ञापन एजेंसियों का कहना है कि माननीय हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध होर्डिंग्स हटाए जाएं, लेकिन वर्षों से नगर निगम की अनुमति से लगे वैध होर्डिंग्स के खिलाफ अनावश्यक कठोर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
इसी के साथ डिवाइडर पर लगे कियोस्क और होर्डिंग्स को लेकर भी 12 फीट से अधिक ऊंचाई का निर्देश दिया गया है, ताकि वाहन चालकों के लिए ब्लाइंड स्पॉट की स्थिति न बने।
फुटपाथ या पाथवे पर लगे होर्डिंग्स के मामले में भी उन्हें 12 फीट की ऊंचाई तक समायोजित करने की बात कही गई है। यदि किसी होर्डिंग को इस ऊंचाई पर समायोजित करना संभव नहीं है, तो उसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने और संबंधित विज्ञापन एजेंसी को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
एजेंसियों का कहना है कि 12 फीट का नियम हर होर्डिंग पर अपने आप लागू नहीं किया जा सकता। यह नियम उन स्थानों से जुड़ा है जहां फुटपाथ है या भविष्य में फुटपाथ बनने की स्थिति है।
एक साल अनुमति, अगले साल वही होर्डिंग अवैध?
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की अपनी अनुमति व्यवस्था को लेकर उठाया जा रहा है।
विज्ञापन एजेंसियों की ओर से सवाल है कि अगर नगर निगम किसी होर्डिंग को एक साल के लिए अनुमति देता है और उससे राजस्व प्राप्त करता है, तो अगले साल उसी होर्डिंग को अवैध घोषित करने का आधार क्या है?
अगर नियमों में बदलाव हुआ है तो उसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों को किस तरह दी गई? और अगर किसी होर्डिंग में नियमों के मुताबिक बदलाव किया जा सकता है, तो उसे सीधे काटने की बजाय सुधार का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा?
एजेंसियों ने नगर निगम से इस पूरी व्यवस्था पर एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट लिखित जवाब देने की मांग की है। साथ ही मांग की गई है कि किसी होर्डिंग की वैधता और वास्तविक स्थिति की जांच पूरी होने तक वैध होर्डिंग्स के खिलाफ कठोर कार्रवाई न की जाए।
एक ही जगह दो अलग-अलग मापदंड?
नगर निगम की कार्रवाई को लेकर विज्ञापन एजेंसियों ने कार्रवाई में असमानता का भी मुद्दा उठाया है।
उनका कहना है कि कुछ जगहों पर एक ही चौराहे पर सड़क से पीछे लगे किसी एक होर्डिंग को काट दिया जा रहा है, जबकि उसी जगह सड़क के किनारे लगे दूसरे होर्डिंग के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सभी होर्डिंग्स के लिए एक समान मापदंड तय किया गया है या कार्रवाई अलग-अलग तरीके से की जा रही है?
एजेंसियों की मांग है कि किसी भी होर्डिंग के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसकी अनुमति, लाइसेंस, लोकेशन, ऊंचाई और फुटपाथ या पाथवे की स्थिति की जांच की जाए। इसके बाद ही तय किया जाए कि होर्डिंग को हटाना है, उसकी ऊंचाई बढ़ानी है या उसे दूसरी जगह स्थानांतरित करना है।
जब नियम 12 फीट का है तो निगम के अपने कियोस्क पर सवाल क्यों?
विवाद यहीं खत्म नहीं होता। विज्ञापन एजेंसियों का आरोप है कि नगर निगम खुद हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए अपने ब्रांडिंग के लिए पोल-कियोस्क करीब 5 फीट की ऊंचाई पर लगा रहा है।

यहीं से निगम की कार्रवाई पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब कम ऊंचाई के होर्डिंग्स को ब्लाइंड स्पॉट और नियमों का हवाला देकर निशाना बनाया जा रहा है, तो निगम की अपनी ब्रांडिंग वाले करीब 5 फीट के पोल-कियोस्क किस नियम के तहत लगाए जा रहे हैं?
क्या 12 फीट का नियम सिर्फ विज्ञापन एजेंसियों के लिए है? अगर नहीं, तो क्या निगम की अपनी संरचनाओं पर भी यही मानक लागू होगा?
नगर निगम को इस सवाल का भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
एजेंसियां बोलीं- आदेश का पालन करेंगे, लेकिन कार्रवाई समान हो
विज्ञापन एजेंसियों की ओर से यह भी कहा गया है कि वे हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करती हैं और उसके अनुपालन के लिए जरूरी बदलाव कर रही हैं। कई विज्ञापन संरचनाएं हटाई जा चुकी हैं, कई को 12 फीट से अधिक ऊंचाई पर किया जा चुका है और कई जगह तकनीकी बदलाव भी किए जा रहे हैं।

ऐसे में एजेंसियों की मांग है कि निगम अवैध और वैध होर्डिंग्स के बीच स्पष्ट अंतर करे और कार्रवाई के लिए समान एवं पारदर्शी मापदंड अपनाए।
सवाल अब सिर्फ होर्डिंग हटाने का नहीं है। सवाल यह है कि जिस नियम का हवाला देकर कार्रवाई की जा रही है, क्या वही नियम नगर निगम की अपनी संरचनाओं पर भी लागू होगा?
नगर निगम से इसी पर स्पष्ट जवाब की मांग की जा रही है।
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