रांची: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने हजारों परिवारों को अपनों से दूर कर दिया है। हिमस्खलन के बाद आई भीषण बाढ़ में 12 हजार से अधिक लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि पांच हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस त्रासदी के बीच अपने परिजनों की तलाश कर रहे भारतीय परिवारों के लिए अब डीएनए जांच के जरिए पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने लापता भारतीयों की पहचान में मदद के लिए देशभर में उनके नजदीकी जैविक रिश्तेदारों के DNA सैंपल जुटाने की व्यवस्था की है। इन सैंपलों की प्रोफाइल तैयार की जाएगी और नेपाल में बरामद होने वाले अज्ञात शवों के DNA से उनका मिलान किया जाएगा। इससे शवों की पहचान वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
झारखंड में होटवार लैब में होगी DNA प्रोफाइलिंग
झारखंड में इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी राजधानी रांची के होटवार स्थित डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी को दी गई है। यहां लापता लोगों के योग्य रिश्तेदारों के DNA सैंपल लिए जाएंगे और उनकी फॉरेंसिक जांच कर प्रोफाइल तैयार की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया के समन्वय और सुचारू संचालन के लिए फॉरेंसिक लैब के असिस्टेंट डायरेक्टर ज्वाला कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। झारखंड और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े लापता लोगों के प्रथम-श्रेणी के जैविक रिश्तेदारों के सैंपल इसी व्यवस्था के तहत लिए जाएंगे।
कौन-कौन दे सकता है DNA सैंपल?
विदेश मंत्रालय की ओर से तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, DNA सैंपल हर व्यक्ति का नहीं लिया जाएगा। इसके लिए लापता व्यक्ति के फर्स्ट-डिग्री जैविक रिश्तेदार ही पात्र होंगे।
इसमें शामिल हैं-
- माता-पिता
- बेटा या बेटी
- सगे भाई या बहन
इन रिश्तेदारों के DNA सैंपल से तैयार प्रोफाइल को नेपाल में मिलने वाले अज्ञात शवों के DNA से मिलाया जा सकेगा। इससे किसी शव की पहचान को लेकर बनी अनिश्चितता को वैज्ञानिक जांच के जरिए दूर करने में मदद मिलेगी।
नेपाल की इस त्रासदी के बाद बड़ी संख्या में परिवार अब भी अपने परिजनों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में DNA प्रोफाइलिंग की यह प्रक्रिया उन परिवारों के लिए उम्मीद की एक अहम कड़ी बन सकती है, जो अब तक अपनों की कोई पुख्ता खबर नहीं मिलने के कारण असमंजस में हैं।
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