Wednesday, October 14

गढ़वा के तुरेर गांव के पास CRPF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, सूचना के आधार पर चलाया गया अभियान; बरामद सिलेंडरों को जब्त कर जांच में जुटी टीम

झारखंड के गढ़वा जिले में बूढ़ा पहाड़ की तलहटी के जंगलों में सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान दो गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। यह बरामदगी तुरेर गांव के समीप जंगल से हुई है। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और बड़गड़ थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया। दोनों गैस सिलेंडरों को जब्त कर लिया गया है।

बूढ़ा पहाड़ का इलाका लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र के जंगलों में तलाशी अभियान के दौरान किसी भी संदिग्ध वस्तु के मिलने पर सुरक्षाबल विशेष सतर्कता बरतते हैं। हालांकि, फिलहाल बरामद गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल और उन्हें जंगल में रखे जाने के उद्देश्य को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

सूचना के आधार पर जंगल में चलाया गया अभियान

मिली जानकारी के अनुसार, वरीय अधिकारियों के निर्देश पर प्राप्त सूचना के आधार पर CRPF और बड़गड़ थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने तुरेर गांव के आसपास के जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने इलाके की तलाशी ली। इसी क्रम में टीम को दो गैस सिलेंडर मिले।

इसके बाद दोनों सिलेंडरों को अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया गया। हालांकि, ये सिलेंडर किसके हैं, इन्हें जंगल में किस उद्देश्य से रखा गया था और इनका किसी प्रतिबंधित संगठन से कोई संबंध है या नहीं, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

माओवादी गतिविधियों के इतिहास के कारण सतर्कता

बूढ़ा पहाड़ झारखंड के उन इलाकों में शामिल रहा है, जहां लंबे समय तक माओवादियों की सक्रियता रही। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और घने जंगल अतीत में माओवादी गतिविधियों के लिए अनुकूल माने जाते थे। इसी वजह से यहां समय-समय पर सुरक्षाबलों की ओर से सर्च ऑपरेशन और सुरक्षा संबंधी अभियान चलाए जाते रहे हैं।

क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षाबल लगातार सतर्क रहते हैं। तुरेर गांव के पास दो गैस सिलेंडरों की बरामदगी के बाद भी मामले से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण है।

बरामदगी के बाद जांच जरूरी

जंगल से मिले दोनों गैस सिलेंडरों को जब्त कर लिया गया है। अब यह पता लगाना जरूरी होगा कि वे वहां कैसे पहुंचे और क्या उनका किसी संदिग्ध गतिविधि से संबंध है। फिलहाल बरामदगी के आधार पर किसी माओवादी संगठन की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की जा सकती।

सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई के दौरान किसी गिरफ्तारी या अन्य संदिग्ध सामग्री की बरामदगी की सूचना भी उपलब्ध नहीं है। जांच से जुड़े आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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