बोकारो: सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की समय पर पहचान एवं स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने के लिए बोकारो जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की पहल की जा रही है। विकास सारथी, सीआईएल और जेएचपीआईईजीओ के सहयोग से जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में स्क्रीनिंग व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा।
इस पहल के तहत जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), अनुमंडलीय अस्पताल (SDH) और सदर अस्पताल को स्क्रीनिंग व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इसके लिए कुल 14 स्क्रीनिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही 2 RBSK (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) इकाइयों को भी आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।
शुरुआती पहचान पर रहेगा जोर
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की शुरुआती अवस्था में पहचान करना है, ताकि प्रभावित लोगों को समय पर आवश्यक परामर्श, जांच और उपचार से जोड़ा जा सके। खास तौर पर बच्चों और युवाओं की स्क्रीनिंग के जरिए संभावित मामलों की समय रहते पहचान करने पर जोर दिया जाएगा।
स्क्रीनिंग की सुविधा स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के लोगों को स्थानीय स्तर पर जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद है। स्क्रीनिंग के दौरान संदिग्ध पाए जाने वाले मामलों को आवश्यकता के अनुसार आगे की जांच और उपचार के लिए संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ा जाएगा।
स्क्रीनिंग किट और संसाधन भी मिलेंगे
CSR के तहत स्क्रीनिंग कार्य के लिए आवश्यक किट और अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे जिले में व्यापक स्तर पर सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षु IAS ने सदर अस्पताल में मशीन का किया निरीक्षण
इसी क्रम में मंगलवार को प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन ने सदर अस्पताल का निरीक्षण किया और सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया की स्क्रीनिंग के लिए उपलब्ध मशीन की जानकारी ली।
उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. ए.बी. प्रसाद और सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. एन.पी. सिंह से मशीन के संचालन, स्क्रीनिंग प्रक्रिया और अब तक की तैयारियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षु आईएएस ने स्क्रीनिंग व्यवस्था को प्रभावी तरीके से संचालित करने और अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
विकास सारथी, सीआईएल और जेएचपीआईईजीओ के सहयोग से की जा रही यह पहल बोकारो जिले में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की शीघ्र पहचान, रोकथाम और समय पर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।
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