Wednesday, September 9

गिरिडीह/रांची: कुछ राजनीतिक सफर सिर्फ चुनाव जीतने और सत्ता तक पहुंचने की कहानी नहीं होते। वे संघर्ष, संगठन, आंदोलन और अपने क्षेत्र के लिए देखे गए सपनों की कहानी होते हैं। सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक यात्रा भी कुछ ऐसी ही थी। झारखंड आंदोलन के दौर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले सोनू ने जमीनी राजनीति से शुरुआत की और धीरे-धीरे संगठन में अपनी जगह बनाते हुए विधायक और फिर झारखंड सरकार में मंत्री तक का सफर तय किया।

लेकिन उनका यह सफर अब अचानक थम गया है। झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके जाने के साथ सिर्फ एक विधायक या मंत्री नहीं, बल्कि लंबे समय तक झारखंड आंदोलन और राजनीति के मैदान में सक्रिय रहे एक जमीनी नेता की यात्रा भी विराम ले गई।

1989 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर

सुदिव्य कुमार सोनू ने 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से राजनीति की शुरुआत की। उस दौर में झारखंड अलग राज्य के आंदोलन की आवाज बुलंद हो रही थी। सोनू दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ झारखंड आंदोलन में शामिल रहे। आंदोलन के दौरान उन पर एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हुए।

यानी उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत किसी पद या सत्ता से नहीं, बल्कि आंदोलन और संघर्ष के दौर से हुई थी।

इसके बाद संगठन में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं।

1990 में वे नगर अध्यक्ष बने।

इसके बाद 2003 में जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

2006 में गिरिडीह जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष बने।

संगठन से लेकर चुनावी राजनीति तक का यह सफर उन्हें धीरे-धीरे उस मुकाम तक लेकर गया, जहां वे गिरिडीह की राजनीति का एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गए।

तीन चुनावों के बाद 2019 में पहली बार बने विधायक

सुदिव्य कुमार सोनू ने 2009 में गिरिडीह विधानसभा का पहला चुनाव लड़ा।

इसके बाद 2014 में गिरिडीह विधानसभा का दोबारा चुनाव लड़ा।

लगातार राजनीतिक संघर्ष के बाद 2019 में पहली बार गिरिडीह के विधायक बने।

इसके बाद 2024 में दूसरी बार गिरिडीह के विधायक चुने गए। चुनावी सफलता के बाद उन्हें झारखंड सरकार में *नगर विकास, आवास, पर्यटन, युवा कार्य एवं कला संस्कृति, तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री* की जिम्मेदारी मिली।

एक जमीनी कार्यकर्ता से शुरू हुआ सफर अब राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी तक पहुंच चुका था।

झारखंड को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने का सपना

सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक विजन में झारखंड के विकास के साथ पर्यटन को भी खास जगह मिली। उनका सपना था कि झारखंड को पर्यटन के क्षेत्र में देश के मानचित्र पर स्थापित किया जाए।

वे झारखंड को माइनिंग टूरिज्म बनाने का लक्ष्य भी रखते थे।

उनकी सोच सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। गिरिडीह में भी उन्होंने कई ऐसी योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम किया, जिन्हें क्षेत्र के विकास से जोड़कर देखा गया।

गिरिडीह के विकास से जुड़े कई काम

गिरिडीह में यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, इंजिनियरिंग कॉलेज, नये रूप में महिला महाविद्यालय, चिड़ियाघर, बायोडायवर्सिटी पार्क, लाइब्रेरी जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में जेसी बोस सीएम एक्सीलेंस स्कूल, पचम्बा सीएम एक्सीलेंस स्कूल और सीएम एक्सीलेंस स्कूल कस्तूरबा गांधी बालिका गिरिडीह जैसी योजनाएं भी उनके कार्यकाल से जुड़ी रहीं।

इसके अलावा 50 हजार लीटर प्रतिदिन की मेधा डेयरी परियोजना, फोरलेन निर्माण, बायपास सड़क की स्वीकृति जैसे काम भी उनके विकास के विजन का हिस्सा रहे।

सिंचाई के क्षेत्र में पीरटांड़ में मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना को आगे बढ़ाया गया।

गिरिडीह को झारखंड का पहला सोलर सिटी बनाने की दिशा में भी काम हुआ।

शहर के विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़ी योजनाओं में उसरी नदी के किनारे शास्त्री नगर से अरगाघाट तक मेरिन ड्राइव, खंडोली और वाटर फाल का सौन्दर्यीकरण सहित कई जनहित की योजनाएं धरातल पर उतारी गईं।

एक सफर, जो अचानक अधूरा रह गया

1989 में शुरू हुआ यह राजनीतिक सफर आंदोलन से संगठन तक, संगठन से चुनावी मैदान तक और फिर विधायक से मंत्री तक पहुंचा। इस सफर में संघर्ष भी था, जिम्मेदारियां भी थीं और गिरिडीह के विकास को लेकर कई सपने भी।

सुदिव्य कुमार सोनू अब इस दुनिया में नहीं हैं। हार्ट अटैक ने उनकी जिंदगी को अचानक विराम दे दिया। पीछे रह गई है तीन दशक से ज्यादा लंबी राजनीतिक यात्रा और उन योजनाओं की एक लंबी सूची, जिन्हें उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के सपने से जोड़ा था।

एक ऐसा नेता, जिसने अपनी राजनीति की शुरुआत 1989 में आंदोलन की जमीन से की, जिसने मुकदमों और संघर्षों के बीच संगठन को मजबूत किया, जिसने 1990 में नगर अध्यक्ष से लेकर 2003 में जिला अध्यक्ष और 2006 में जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष तक की जिम्मेदारियां निभाईं, जिसने 2009 और 2014 में चुनाव लड़ा और आखिरकार 2019 में पहली बार विधायक तथा 2024 में दूसरी बार विधायक बना।

मंत्री के रूप में उनके सामने अभी कई सपने थे। झारखंड को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने का सपना था, माइनिंग टूरिज्म का लक्ष्य था और गिरिडीह के विकास की कई योजनाएं थीं।

लेकिन जिंदगी ने उन्हें इन सपनों को पूरा करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं दिया।

एक जमीनी कार्यकर्ता से मंत्री तक पहुंचा यह सफर अब इतिहास का हिस्सा है… और सुदिव्य कुमार सोनू का नाम उनके संघर्ष, राजनीतिक यात्रा और विकास के सपनों के साथ याद किया जाता रहेगा।

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