Friday, October 23

क्या हो, जब जिस शिक्षक से आपने सालों तक पढ़ाई की हो, उसी के बारे में एक दिन पता चले कि वह असल में जेल से फरार हुआ उम्रकैद का कैदी था? तेलंगाना से सामने आया एक ऐसा ही मामला है, जिसने शिक्षक की पहचान और उसके बीते जीवन के बीच का चौंकाने वाला सच सामने ला दिया। 1983 में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए इस शख्स को पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद वापस लौटना था, लेकिन वह फरार हो गया। इसके बाद करीब 40 साल तक उसने अपनी पहचान छिपाकर सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी की, ‘बेस्ट टीचर’ का अवॉर्ड जीता और रिटायरमेंट के बाद भी सामान्य जिंदगी जीता रहा। आखिर 2024 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

रिकॉर्ड के मुताबिक, 73 वर्षीय इस व्यक्ति को 1983 में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दिसंबर 1983 में उसे तीन महीने की पैरोल मिली थी। पैरोल की अवधि पूरी होने पर मार्च 1984 में उसे जेल में सरेंडर करना था, लेकिन वह वापस नहीं आया और तब से फरार रहा।

चार दशक तक कानून की नजर से दूर

पुलिस की गिरफ्त से बचने के दौरान उसने सरकारी शिक्षक के तौर पर नौकरी हासिल कर ली। उसने करीब चार दशक तक शिक्षक के रूप में काम किया और 2013 में सेवानिवृत्त हुआ। उसके काम को देखते हुए 2004 में उसे ‘बेस्ट टीचर’ का सम्मान भी दिया गया।

16 मई 2024 को स्पेशल टास्क फोर्स ने आखिरकार उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। जेल प्रशासन ने उसकी 27 दिनों की सजा माफी भी रद्द कर दी और अगले तीन साल तक पैरोल या फरलो पर बाहर आने पर रोक लगा दी।

पत्नी ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

इस फैसले के खिलाफ उसकी पत्नी ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। उसने दलील दी कि अधिकारियों ने करीब 40 साल की देरी के बाद उसके पति के खिलाफ कार्रवाई की। याचिका में यह भी बताया गया कि वह सरकारी शिक्षक के रूप में काम कर चुका है और 2013 में रिटायर हुआ था।

वहीं राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पैरोल खत्म होने के बाद जानबूझकर जेल नहीं लौटा और गिरफ्तारी से बचता रहा। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पैरोल कोई ऐसा अधिकार नहीं है, जिसे कैदी मांग सके।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस टी. माधवी देवी ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर स्थिति है कि एक कैदी 40 साल तक अधिकारियों की नजर से बचा रहा और इस दौरान सरकारी नौकरी तक हासिल कर ली।

अदालत ने माना कि उसने अपनी सजा से जुड़ी जानकारी छिपाकर सरकारी नौकरी हासिल की और जानबूझकर गिरफ्तारी से बचता रहा। इसी आधार पर कोर्ट ने उसकी पत्नी की याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने अधिकारियों को पैरोल पर रिहा होने वाले कैदियों की निगरानी मजबूत करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश भी दिया।

इसे भी पढ़े – निखार मर्डर: पहले कई टारगेट, फिर निखार पर लॉक; MP तक पहुंची पुलिस, शूटर गिरफ्तार

Share.
Next Story
मैं ना झुकूँगा, ना रुकूँगा, ना टूटूँगा – पुलिस एसोसिएशन विवाद के बीच जयराम महतो का बड़ा बयान
Exit mobile version