Friday, October 2

The Vvaan Movie: सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ आज यानी 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म की कहानी बिहार की लोककथाओं, वन देवी, रहस्यमयी जंगल और छठ पूजा की परंपराओं को एक सुपरनैचुरल थ्रिलर के साथ जोड़ती है। फिल्म को लेकर खास तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत के दर्शकों के बीच उत्सुकता देखने को मिली है। फिल्म की रिलीज डेट 25 सितंबर तय होने की पुष्टि मेकर्स की घोषणा और रिलीज कवरेज में हुई थी।

बिहार की लोककथा से निकली रहस्यमयी कहानी, जंगल में क्या छिपा है राज?

फिल्म की कहानी ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और उसकी पत्नी ममता (तमन्ना भाटिया) के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों अपने पुश्तैनी गांव देवांचल पहुंचते हैं। शुरुआत में उनका गांव लौटना जमीन और परिवार से जुड़े एक मामले की वजह से होता है, लेकिन जल्द ही कहानी एक ऐसे रहस्यमयी जंगल और लोककथा की तरफ मुड़ जाती है, जिसका गांव के लोगों की आस्था से गहरा संबंध है।

कहानी में वन देवी और जंगल से जुड़ी मान्यताएं अहम भूमिका निभाती हैं। फिल्म का आधार बिहार के बिहटा के वन देवी मंदिर से जुड़ी लोककथा से प्रेरित बताया गया है, जहां वन देवी को आसपास के क्षेत्र की रक्षा करने वाली देवी के रूप में माना जाता है।

छठ पूजा फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा, तमन्ना का दिखा अलग अंदाज

‘द व्वान’ की सबसे खास चीजों में से एक इसका छठ पूजा से जुड़ा हिस्सा है। फिल्म में छठ केवल एक बैकग्राउंड त्योहार के तौर पर नहीं बल्कि कहानी और किरदारों की भावनाओं से जुड़ा नजर आता है।

फिल्म के ‘छठी मईया’ गाने में तमन्ना भाटिया को छठ पूजा करते हुए दिखाया गया है। गाने में आस्था, मनोकामना और परिवार से जुड़ी भावनाओं को प्रमुखता दी गई है। इसे विशाल मिश्रा ने गाया और संगीत दिया है, जबकि इसके बोल कौशल किशोर ने लिखे हैं।

बिहार और झारखंड के दर्शकों के लिए फिल्म का यह पहलू इसलिए भी खास है क्योंकि छठ इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से गहराई से जुड़ा पर्व है। हालांकि, फिल्म के गाने में छठ की वास्तविक परंपराओं को सिनेमाई अंदाज में पेश किया गया है और कुछ दृश्यों को लेकर स्थानीय परंपराओं से अलग प्रस्तुति की बात भी सामने आई है।

जमीन का विवाद या जंगल का रहस्य? ऐसे बदलती है कहानी की दिशा

ऋषि जब अपने गांव पहुंचता है तो उसके सामने सिर्फ जमीन से जुड़ा विवाद नहीं होता। धीरे-धीरे उसे गांव और जंगल से जुड़ी ऐसी मान्यताओं का सामना करना पड़ता है, जिन पर वह शुरुआत में विश्वास नहीं करता।

एक तरफ आधुनिक सोच रखने वाला ऋषि है, वहीं दूसरी तरफ गांव की आस्था और वन देवी से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताएं हैं। यही टकराव फिल्म को हॉरर और फैंटेसी के साथ-साथ भावनात्मक स्तर भी देता है।

फिल्म के ट्रेलर में भी रहस्यमयी जंगल, वन देवी और एक अंधेरी शक्ति से जुड़े संकेत देखने को मिले थे। मेकर्स ने फिल्म को लोककथा, फैंटेसी, हॉरर और एडवेंचर के मिश्रण के तौर पर पेश किया है।

सिद्धार्थ और तमन्ना की जोड़ी पर टिकी कहानी

फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ऋषि का किरदार निभाया है, जबकि तमन्ना भाटिया ममता के रोल में हैं। दोनों का रिश्ता कहानी के भावनात्मक पक्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ममता की आस्था और ऋषि की तर्कवादी सोच के बीच का अंतर कहानी में कई सवाल खड़े करता है। फिल्म के रिलीज-डे रिव्यू में भी इस भावनात्मक पहलू और छठ से जुड़े दृश्यों को कहानी के उल्लेखनीय हिस्सों के तौर पर रेखांकित किया गया है।

‘समझो ना’ से ‘छठी मईया’ तक, कैसा है फिल्म का म्यूजिक?

फिल्म का संगीत इसके अलग-अलग मूड को सामने लाने की कोशिश करता है। ‘समझो ना’ में रोमांटिक भाव देखने को मिलता है, जबकि ‘छठी मईया’ पूरी तरह भक्ति और आस्था के रंग में रंगा है।

वहीं ‘थुम्मक थुम्मक’ फिल्म के संगीत में ऊर्जा और डांस वाला अंदाज लेकर आता है। खासकर ‘छठी मईया’ के जरिए फिल्म ने कहानी के सांस्कृतिक पक्ष को संगीत से जोड़ने की कोशिश की है।

हॉरर के साथ लोककथा और प्रकृति संरक्षण का संदेश

‘द व्वान’ सिर्फ डर और रहस्य पर निर्भर नहीं रहती। फिल्म की कहानी लोककथा, आस्था और इंसान के प्रकृति के साथ रिश्ते को भी सामने लाती है।

रहस्यमयी जंगल, वन देवी और गांव की परंपराओं के जरिए फिल्म प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देने की कोशिश करती है। यही वजह है कि फिल्म में हॉरर और रोमांच के साथ एक सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू भी दिखाई देता है।

रिलीज के साथ बढ़ी दर्शकों की उत्सुकता

25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘The Vvaan: Force of the Forest’ ने लोककथा और सुपरनैचुरल कहानी को बड़े पर्दे पर पेश किया है। फिल्म की कहानी में बिहार की संस्कृति, छठ पूजा, रहस्यमयी जंगल और वन देवी जैसे तत्वों का मेल है।

फिल्म का खास आकर्षण उन दर्शकों के लिए है जो भारतीय लोककथाओं और स्थानीय संस्कृति को फैंटेसी तथा हॉरर के साथ बड़े पर्दे पर देखना पसंद करते हैं।

Share.
Next Story
क्या अब स्कूलों में ‘रेनी डे’ की छुट्टी बंद हो गई है ?
Exit mobile version