Tuesday, October 13

साहिबगंज/रांची: झारखंड में बच्चों के अपहरण और बच्चा चोरी की खबरें सामने आते ही अफवाहों का बाजार भी गर्म हो जाता है। कहीं बच्चों को बेचने की बात कही जाती है तो कहीं इन्हें अंगों की तस्करी और ‘किड हार्वेस्टिंग’ जैसे दावों से जोड़ दिया जाता है। लेकिन तीनपहाड़ और राजमहल इलाके से जुड़ी पुलिस जांच में एक अलग आपराधिक मॉडल सामने देखने को मिलता है। जांच में ऐसे गिरोहों का पता चला है, जो कम उम्र के बच्चों को चोरी के लिए इस्तेमाल करने और उन्हें जेबमारी, पर्स और मोबाइल चोरी की ट्रेनिंग देने के आरोपों में सामने आए हैं।

तीनपहाड़ का नाम खास तौर पर इसलिए चर्चा में आता है क्योंकि पुराने पुलिस मामलों में इस इलाके को ऐसे नेटवर्क से जोड़ा गया, जहां बच्चों को चोरी की तकनीक सिखाकर बाद में बड़े शहरों में भेजे जाने की बात सामने आई। 2023 में रांची पुलिस ने नाबालिगों से मोबाइल चोरी कराने वाले एक गिरोह का खुलासा किया था। पुलिस जांच में तीनपहाड़ और राजमहल इलाके में बच्चों को मोबाइल चोरी की ट्रेनिंग दिए जाने की बात सामने आई थी।

बच्चों को कैसे इस्तेमाल करता है गिरोह?

जांच में सामने आए मॉडल के मुताबिक, छोटे बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर चोरी करने के लिए तैयार किया जाता था। उन्हें इस तरह चोरी करने की ट्रेनिंग दी जाती थी कि आसपास मौजूद लोगों को तत्काल शक न हो। इसके बाद बच्चों को रेलवे स्टेशन, बाजार, बस स्टैंड और दूसरे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भेजा जाता था।

रांची जैसे बड़े शहर इस नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण ठिकाने बताए गए हैं। ट्रेन के जरिए बच्चों को दूसरे शहरों तक पहुंचाने और वहां चोरी की घटनाओं को अंजाम दिलाने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई है।

कम उम्र के बच्चों का इस्तेमाल किए जाने के पीछे गिरोह की एक रणनीति यह बताई गई कि भीड़ में बच्चे आम लोगों की नजर में कम संदिग्ध लगते हैं। चोरी के बाद मोबाइल या दूसरे सामान को गिरोह के दूसरे सदस्य अपने कब्जे में ले लेते हैं।

तीनपहाड़ से रांची तक और आगे का नेटवर्क

इस पूरे मामले में तीनपहाड़ और राजमहल का नाम इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पुलिस के पुराने मामलों में इन इलाकों को बच्चों को अपराध के लिए तैयार करने वाले नेटवर्क से जोड़ा गया है। चोरी के मोबाइल को आगे दूसरे लोगों तक पहुंचाने और बेचने की व्यवस्था भी इस नेटवर्क का हिस्सा बताई गई है।

कुछ जांच और मीडिया रिपोर्टों में चोरी के मोबाइल को बांग्लादेश और नेपाल तक पहुंचाए जाने का भी दावा है।

हालिया विवान अपहरण मामला…

हाल ही में रांची रेलवे स्टेशन से चार वर्षीय विवान के अपहरण और साहिबगंज के तीनपहाड़ से उसकी सकुशल बरामदगी ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 24 सितंबर 2026 को विवान अपनी मां और बहन के साथ रांची रेलवे स्टेशन पहुंचा था। स्टेशन के बाहर उसकी मां ऑटो की जानकारी लेने में व्यस्त थीं, इसी दौरान बच्चा लापता हो गया। पुलिस ने CCTV और अन्य सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई, जिसके बाद धनबाद से एक संदिग्ध को पकड़ा गया और उसकी निशानदेही पर तीनपहाड़ में छापेमारी कर विवान को बरामद किया गया। मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की शुरुआती रिपोर्ट के बाद छह आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई थी।

दुर्गापूजा में बच्चों पर रखे विशेष ध्यान..

अब दुर्गापूजा शुरू होने वाली है और आने वाले दिनों में बाजारों, पूजा पंडालों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक जगहों पर भारी भीड़ देखने को मिलेगी। ऐसे माहौल में अभिभावकों के लिए बच्चों को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहना जरूरी है।

छोटे बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें। पूजा पंडाल या मेले में जाते समय बच्चों पर लगातार नजर रखें और संभव हो तो उनका हाथ पकड़े रखें। बच्चों को अपना नाम, माता-पिता का नाम और किसी भरोसेमंद परिजन का मोबाइल नंबर याद करवाना भी उपयोगी हो सकता है। बड़े आयोजनों में बच्चों के कपड़ों या जेब में अभिभावक का संपर्क नंबर रखना भी मददगार हो सकता है।

सिर्फ तीनपहाड़ ही नहीं, बच्चों को अपराध में इस्तेमाल करने वाले गिरोह अलग-अलग इलाकों में सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि को हल्के में ना लें।

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