Tuesday, October 13

रांची: झारखंड विधानसभा परिसर में मंगलवार को 77वां राज्यव्यापी वन महोत्सव 2026 आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। दोनों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जल, जंगल, पहाड़, नदियां और समृद्ध प्राकृतिक संसाधन झारखंड की पहचान हैं। जंगल और प्रकृति राज्य के जनजीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए आज से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।

जल संरक्षण पर भी दिया जोर

हेमंत सोरेन ने भविष्य में बढ़ते जल संकट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्षा जल का अधिक से अधिक संचयन कर उसे धरती के भीतर पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने छोटे-बड़े सभी शहरों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।

विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण को होने वाले नुकसान का असर मानव जीवन के साथ-साथ पशु-पक्षियों और पूरी जैव-विविधता पर पड़ता है। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

विधायक आवासीय परिसर में भी लगाए जाएंगे फलदार पौधे

मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि विधायकों के आवासीय परिसरों में भी फलदार पौधों का रोपण कराया जाए। उन्होंने पौधों की देखभाल, खाद और पोषण के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही।

विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने भी वन महोत्सव के उद्देश्य और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने स्वागत संबोधन दिया।

मौके पर मंत्री राधा कृष्ण किशोर, हफीजुल हसन, इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की, विधायकगण, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।

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