Tuesday, October 13

एआई के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के बीच इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को नई तकनीक के पीछे भागने के बजाय अपने मूल सिद्धांतों की समझ मज़बूत करनी चाहिए। यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के प्राध्यापक डॉ. उदय बी. सिंह ने सरला बिरला विश्वविद्यालय में आयोजित एक्सपर्ट टॉक के दौरान कही।

इंजीनियरिंग के मूल सिद्धांतों और उनके व्यावहारिक उपयोग पर केंद्रित यह कार्यक्रम सरला बिरला विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के बीच हुए शैक्षणिक करार के तहत आयोजित किया गया। डॉ. सिंह यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के बायो-प्रोडक्ट्स एंड बायोसिस्टम्स इंजीनियरिंग विभाग में प्राध्यापक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित किया।

केवल तकनीक के पीछे चलना काफ़ी नहीं

डॉ. सिंह ने कहा कि आज एआई लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। ऐसे समय में केवल नई तकनीक के पीछे चलने के बजाय इंजीनियरिंग के बुनियादी सिद्धांतों को समझना ज़रूरी है। उनके अनुसार, मज़बूत बुनियादी ज्ञान, तार्किक सोच और समस्या का व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता ही इंजीनियरों को बेहतर बनाती है।

समाज की समस्याओं का टिकाऊ समाधान ही उद्देश्य

विद्यार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकें सीखने के साथ-साथ अपने मूल विषयों की समझ को भी सुदृढ़ करें। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग का उद्देश्य केवल तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि समाज और वास्तविक जीवन की समस्याओं के लिए उपयोगी और टिकाऊ समाधान तैयार करना है।

गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के माननीय महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक, माननीय कुलपति प्रो. सी. जगनाथन और कुलसचिव प्रो. एस. बी. दंडिन उपस्थित रहे। इनके अलावा विभिन्न संकायों के डीन, एसोसिएट डीन और विभागाध्यक्षों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

विश्वविद्यालय के माननीय प्रतिकुलाधिपति श्री बिजय कुमार दलान तथा राज्यसभा सांसद एवं निदेशक (प्लानिंग एंड डेवलपमेंट) डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने आयोजक मंडली को कार्यक्रम के लिए शुभकामना संदेश भेजा।

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