Wednesday, September 9

स्टील सिटी में निखार सबलोक हत्याकांड की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है, जहां हत्या की कहानी के पीछे गैंगवार, कथित कारोबारी वर्चस्व, राजनीतिक महत्वाकांक्षा और मीडिया नेटवर्क की परतें तलाश रही हैं। एसआईटी ने कथित मुख्य साजिशकर्ता राघव समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है—क्योंकि पुलिस की नजर उन चेहरों पर है, जो अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। लेकिन इसमें जो सबसे अहम कड़ी है वह यह है कि झारखंड में होने वाली बड़ी हत्याओं के पीछे उत्तर प्रदेश के शूटर्स का हमेशा कनेक्शन रहा है। सुशील श्रीवास्तव , नीरज सिंह हत्याकांड में भी यूपी से शूटर्स बुलाए गए थे. मामला साफ है कि झारखंड के दबंगों की सुपारी उत्तर प्रदेश के शूटर्स उठा रहे हैं और बहुत ही सफाई के साख हत्याकांड को अंजाम देते रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ निखार सबलोक हत्याकांड में गिरफ्तार राघव का मीडिया के साथ भी मजबूत कनेक्शन बताया जा रहा है। जानकारों की मानें तो राघव एक यूटयूब मीडिया पोर्टल का संचालक भी रहा है और एक अंग्रेजी अखबार …..मेल का पार्टनर भी है.

राघव के जेल जाते ही खुलने लगीं साजिश की परतें—गैंगवार, कारोबार, राजनीति और मीडिया नेटवर्क की उलझी कहानी

 

एक हत्या… और पीछे छिपा पूरा नेटवर्क?

राघव को कथित तौर पर अखिलेश सिंह का करीबी माना जाता रहा है। दावा है कि देहरादून में विक्रम शर्मा की हत्या के बाद जमशेदपुर में अखिलेश सिंह से जुड़े कथित कारोबार की कमान राघव ने संभाली थी। राघव का काम अखिलेश सिंह के काले धन का सफेद धंधों में निवेश रहा है। यही कड़ी अब निखार सबलोक हत्याकांड की जांच में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

अंडरवर्ल्ड से मीडिया की दुनिया तक!

राघव का कथित मीडिया कनेक्शन सबसे चौंकाने वाला पहलू बनकर सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि राघव जमशेदपुर से संचालित एक यूट्यूब चैनल का संचालन करता था और एक अंग्रेजी अखबार में कथित तौर पर साझेदार था। दावा यह भी है कि यूट्यूब चैनल पहले विक्रम शर्मा से जुड़ा था, लेकिन उसकी हत्या के बाद इसका संचालन राघव के हाथ में आ गया। मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कथित तौर पर अखिलेश सिंह की सार्वजनिक छवि को भविष्य में को बेहतर बनाने की प्लानिंग थी साथ ही साथ बड़े ताल्लुक भी क्रियेट किए जा रहे थे।

 

विक्रम की राजनीति में एंट्री… और बढ़ी दूरी?

अंडरवर्ल्ड से जुड़े सूत्रों का दावा है कि विक्रम शर्मा आने वाले दिनों में जमशेदपुर से चुनाव लड़ने की तैयारी में था। इसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को कथित तौर पर अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा के बीच विवाद भी था। विक्रम की नजदीकियां जहां सत्ताधारी नेताओं के साथ बतायी जा रही हैं वहीं अखिलेश सिंह के करीबियों में जमशेदपुर के कई बड़े नेता बताये जाते हैं जो विपक्ष के बड़े चेहरे हैं।

 

निखार किसके रास्ते की ‘अड़चन’ था?

निखार सबलोक को गणेश सिंह का करीबी बताया जाता था। सूत्रों का दावा है कि निखार और अखिलेश सिंह से जुड़े कारोबार में हितों के बीच टकराव था। इसी कथित टकराव को हत्या की साजिश के संभावित कारणों में से एक माना जा रहा है। क्या निखार सिर्फ एक निशाना था या किसी बड़े गैंगवार की कड़ी? यही सवाल अब एसआईटी की जांच के केंद्र में है।

 

दुमका जेल से साजिश का कथित ‘कंट्रोल रूम’?

हत्याकांड का सबसे गंभीर एंगल यह सामने आया है कि हत्या की साजिश दुमका जेल में रचे जाने की बात कही जा रही है। नीरज सिंह हत्याकांड का शूटर शिबू और अखिलेश की मुलाकात दुमका जेल में ही हुई थी । एसआईटी यह पता लगाने में जुटी हैं कि यदि साजिश जेल के भीतर बनी थी तब बाहर मौजूद लोगों तक निर्देश कैसे पहुंचे, संपर्क का माध्यम क्या था और हत्या को अंजाम देने के लिए नेटवर्क किस तरह सक्रिय हुआ।

 

छह जेल में… लेकिन कहानी के कई किरदार फरार

राघव समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद एसआईटी की कार्रवाई थमी नहीं है। सूत्रों के अनुसार, हत्याकांड से जुड़े कुछ अन्य शूटर अब भी फरार हैं। इनकी तलाश में एसआईटी की टीमें झारखंड के साथ दूसरे राज्यों में भी संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

अब भी कई सवाल अनसुलझे

साजिश किसने रची?

निर्देश किसने दिया?

फंडिंग कहां से हुई?

शूटरों को किसने तैयार किया?

और इस पूरे नेटवर्क के पीछे आखिर कौन-सा बड़ा चेहरा है?

राघव की गिरफ्तारी के बाद जांच की दिशा भले स्पष्ट होती दिखाई दे रही हो, लेकिन अंडरवर्ल्ड, कथित कारोबार, राजनीति और मीडिया के बीच छिपी कड़ियां अभी भी जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा रहस्य बनी हुई हैं। निखार हत्याकांड की अगली गिरफ्तारी शायद इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा अध्याय खोल सकती है

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