Monday, September 21

रांची: अस्पताल में मरीज जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर जाता है। लेकिन अगर मौत के बाद भी बिलिंग का खेल चलता रहे, तो सवाल सिर्फ इलाज का नहीं, पूरे सिस्टम का है। रांची के लालपुर स्थित ऑर्किड अस्पताल में शनिवार को मरीज की मौत के बाद हुए हंगामे ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि मरीज की मौत रात करीब 2 बजे हो गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह कि इसके बाद भी सुबह करीब 5:30 बजे तक फार्मेसी की बिलिंग जारी रही।

यानी मरीज की सांसें थम गईं, लेकिन बिलिंग की सांसें नहीं थमीं?

यही नहीं, परिजनों ने करीब दो घंटे के दौरान मरीज को 200 इंजेक्शन दिए जाने पर भी सवाल उठाया है। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में इंजेक्शनदेना कैसे संभव है?

मौत के बाद भी चलता रहा हिसाब-किताब?

किसी परिवार के लिए मरीज की मौत सबसे बड़ा सदमा होती है। लेकिन अगर उसी वक्त उसे इलाज के बजाय बिल और दवाओं के हिसाब – किताब पर सवाल उठाने पड़ें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ऑर्किड अस्पताल के मामले में यही आरोप सामने आए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने तीन डॉक्टरों की टीम अस्पताल भेजी। टीम ने मौके पर जानकारी जुटाई और अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी है।

FIR के लिए भी भटकता रहा परिवार…

परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। उनका कहना है कि उन्हें शव ले जाने के लिए कहा गया और मामले की प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लगने की बात कही गई।

मामला यहीं नहीं रुका। परेशान परिजन विधायक और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के आवास पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।

सोचिए, एक तरफ घर का सदस्य अस्पताल में दम तोड़ चुका है और दूसरी तरफ परिवार को अपने सवालों के जवाब के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

मरीज के मरने के बाद परिवार किससे लड़े – अस्पताल से, बिल से या सिस्टम से?

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे और सख्ती की बातें सुनने को मिलती हैं। निजी अस्पतालों की मनमानी पर कार्रवाई की बात भी होती है। लेकिन अगर अस्पताल में मरीज की मौत के बाद भी बिलिंग जारी रहने जैसे आरोप सामने आते हैं, तो फिर सवाल स्वास्थ्य विभाग से भी होगा।

अगर निगरानी व्यवस्था इतनी मजबूत है, तो ऐसी शिकायतें बार-बार क्यों सामने आ रही हैं?

क्या निजी अस्पतालों की जांच सिर्फ हंगामा होने के बाद ही होगी?

क्या मरीज की मौत के बाद बिलिंग जैसे गंभीर आरोपों की जांच के लिए भी परिवार को सड़क पर उतरना पड़ेगा?

सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था से परेशान होकर लोग निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। परिवार अपनी क्षमता से ज्यादा पैसा खर्च करने को तैयार हो जाता है, क्योंकि उसे लगता है कि कम से कम यहां इलाज बेहतर मिलेगा।

लेकिन जब निजी अस्पतालों से ही इलाज, बिलिंग और मरीज के अधिकारों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आने लगें, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?

सरकारी अस्पताल में व्यवस्था का सवाल, निजी अस्पताल में बिल का सवाल – बीमार आदमी आखिर किस भरोसे इलाज कराए?

तो सवाल उठाना लाज़मी है कि मौत के बाद आखिर किस चीज का हिसाब बनाया जा रहा था?

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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