पाकुड़: पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम कराए जा रहे झारखंड के पाकुड़ जिले के 10 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है। अभियान के दौरान मालदा के दो अन्य मजदूरों को भी रेस्क्यू किया गया। यह कार्रवाई झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई के बाद संभव हो सकी।
जानकारी के अनुसार, उत्तर दिनाजपुर जिले के चापदुआर एग्रो एंड फूड प्राइवेट लिमिटेड में पाकुड़ के इन नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर बंधक बनाकर जबरन बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद पाकुड़ जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन से संपर्क किया और बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित मुक्त कराने के लिए आधिकारिक अनुरोध किया।
जिला प्रशासन ने उत्तर दिनाजपुर प्रशासन से किया संपर्क
मामले की सूचना मिलने के बाद पाकुड़ जिला प्रशासन की ओर से उत्तर दिनाजपुर के जिला मजिस्ट्रेट को पूरे मामले से अवगत कराया गया। इसके बाद नाबालिगों और किशोर मजदूरों को रेस्क्यू करने के लिए जिला लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, उत्तर दिनाजपुर के सचिव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
इस रेस्क्यू टीम में श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन और इंटरनेशनल जस्टिस मिशन के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। टीम ने उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की रणनीति तैयार की।
सूचना तंत्र ने निभाई अहम भूमिका
रेस्क्यू अभियान में सूचना तंत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। झारखंड राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष, लेबर पाकुड़ जिला प्रशासन और चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के बीच लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया। बच्चों की लोकेशन और उनके संबंध में मिली जानकारी को संबंधित अधिकारियों के साथ साझा किया गया।
सटीक इनपुट मिलने के बाद गठित टीम ने चापदुआर एग्रो एंड फूड प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पाकुड़ के 10 नाबालिग बच्चों को वहां से सुरक्षित मुक्त कराया गया। इसी अभियान में मालदा के दो अन्य मजदूरों को भी रेस्क्यू किया गया।
बाल कल्याण समिति के सामने पेश किए गए बच्चे
रेस्क्यू के बाद सभी 10 नाबालिग बच्चों को तत्काल बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बच्चों की सुरक्षित घर वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही उनकी काउंसलिंग और सरकारी योजनाओं के तहत पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि उन्हें दोबारा ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
बिचौलियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन की ओर से बच्चों को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर काम के लिए ले जाने वाले बिचौलियों और ठेकेदारों के साथ-साथ संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पूरे अभियान में झारखंड और पश्चिम बंगाल की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से नाबालिग बच्चों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली। प्रशासन की ओर से बच्चों की सुरक्षा, घर वापसी और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है।
