Wednesday, September 23

रांची/ओरमांझी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर ओरमांझी प्रखंड के कूटे गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के नाम सूची में नहीं होने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव के करीब 800 लोगों के नाम SIR की प्रक्रिया के बाद तैयार सूची में नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और सोमवार को बड़ी संख्या में लोग जनप्रतिनिधियों के साथ ओरमांझी प्रखंड कार्यालय पहुंचे।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उनके नाम मतदाता सूची में पहले से दर्ज हैं और SIR के तहत फॉर्म भी जमा किया गया, तो फिर बड़ी संख्या में लोगों के नाम सूची में नहीं होने की वजह क्या है? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए ग्रामीण प्रखंड कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी।

बीडीओ से हुई बातचीत, ग्रामीणों ने रखी अपनी समस्या

कूटे गांव के ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के साथ ओरमांझी प्रखंड कार्यालय पहुंचे। वहां उनकी अधिकारियों से बातचीत हुई। ग्रामीणों की ओर से बड़ी संख्या में नाम SIR सूची में नहीं होने का मुद्दा उठाया गया और पूरे मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी एक-दो व्यक्ति का मामला नहीं है। करीब 800 लोगों के नाम नहीं होने की बात सामने आने के बाद सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नाम एक साथ कैसे छूट गए?

जब BLO ने फॉर्म लिया और सत्यापन किया तो फिर कहां आई दिक्कत?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, SIR के दौरान मतदाताओं से फॉर्म भरवाया गया। फॉर्म जमा होने के बाद संबंधित BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर की भूमिका रहती है और प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों एवं जानकारी का सत्यापन किया जाता है।

ऐसे में सवाल यह है कि अगर ग्रामीणों ने फॉर्म जमा किया, BLO स्तर पर प्रक्रिया पूरी हुई और आवेदन आगे भेजा गया, तो फिर अंतिम सूची में करीब 800 लोगों के नाम क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं?

क्या किसी स्तर पर आवेदन या दस्तावेजों की जानकारी अपलोड होने में परेशानी हुई? क्या कुछ फॉर्म तकनीकी कारणों से रिजेक्ट हुए? क्या BLO स्तर पर किसी आवेदन की प्रक्रिया अधूरी रह गई? या फिर अंतिम सूची तैयार करने के दौरान किसी अन्य स्तर पर गड़बड़ी हुई?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने आना बाकी है।

BLO के बाद मामला आगे जाता है, फिर भी नाम कैसे छूटा?

SIR की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों का सवाल यह भी है कि आवेदन सिर्फ BLO स्तर तक सीमित नहीं रहता। प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों के स्तर पर भी इसकी जांच और कार्रवाई होती है। ऐसे में ग्रामीण जानना चाहते हैं कि यदि फॉर्म स्वीकार किया गया था और प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया, तो अंतिम सूची में नाम नहीं आने की स्थिति कैसे बनी।

यही वजह है कि ग्रामीण अब पूरे मामले की जांच और स्पष्ट जानकारी की मांग कर रहे हैं।

800 नामों का मामला, प्रशासन को देनी होगी स्पष्ट जानकारी

करीब 800 लोगों के नाम सूची में नहीं होने की बात सामने आने के बाद यह मामला अब सिर्फ व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। इतने बड़े स्तर पर नामों के छूटने का दावा सामने आने से प्रशासन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, नाम नहीं होने का वास्तविक कारण क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए यह भी जरूरी है कि प्रशासन कूटे गांव के सभी प्रभावित मतदाताओं के फॉर्म और रिकॉर्ड की जांच करे और यह स्पष्ट करे कि नाम किस स्तर पर छूटे।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि यह जानना है कि उनके नाम मतदाता सूची में क्यों नहीं हैं और इसे ठीक कराने की प्रक्रिया क्या होगी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि ओरमांझी प्रखंड प्रशासन इस मामले में क्या जांच करता है और करीब 800 ग्रामीणों के नाम को लेकर सामने आई शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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