बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और बकाया वेतन भुगतान की मांग पर आंदोलन तेज, आज NHM कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन; 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति बदल दी है। संघ ने गुरुवार रात 8 बजे से 40 घंटे तक सेवा बाधित रखने की घोषणा की है। इसके तहत 17 अक्टूबर की सुबह 8 बजे तक एंबुलेंस सेवा बाधित रखने की योजना है। कर्मचारियों का यह कदम बर्खास्त कर्मियों की बहाली और लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर उठाया गया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं पर अब तक ठोस पहल नहीं हुई है। लंबे समय से बकाया वेतन और बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली जैसे मुद्दों का समाधान नहीं होने से उनमें नाराजगी है। इसी के विरोध में संघ ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।
NHM कार्यालय के सामने आज धरना-प्रदर्शन
आंदोलन के अगले चरण में शुक्रवार को कर्मचारी रांची स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान कर्मचारी अपनी मांगों को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों का ध्यान समस्याओं की ओर आकर्षित करेंगे। संघ की प्रमुख मांगों में बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और लंबित वेतन का भुगतान शामिल है।
21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो 21 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि मांगों का समाधान होने तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है।
इस आंदोलन में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की दो मुख्य मांगें हैं:
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बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली — नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लिया जाए।
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लंबित वेतन का भुगतान — कर्मचारियों के बकाया वेतन का जल्द भुगतान किया जाए।
एंबुलेंस सेवा प्रभावित होने से बढ़ सकती है परेशानी
108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बाधित होने से दुर्घटना पीड़ितों, गंभीर मरीजों और अस्पताल पहुंचने के लिए एंबुलेंस पर निर्भर लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में आंदोलन के बीच आपातकालीन सेवाओं को सुचारू बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, कर्मचारियों की मांगों पर संबंधित विभाग की ओर से समाधान की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और आंदोलन को समाप्त कराने के लिए कोई पहल होती है या नहीं।
