रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) को लेकर चल रहे विवाद ने मंगलवार देर रात बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया। सीआईडी और रांची पुलिस की संयुक्त छापेमारी के कुछ ही घंटों बाद JPSC के चेयरमैन एल. खियांग्ते (L. Khiangte) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उनके इस्तीफे के कारणों पर अब तक सरकार या आयोग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
CID की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप
14वीं JPSC PT परीक्षा के परिणामों में कथित अनियमितताओं, मेरिट लिस्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। इन्हीं आरोपों की जांच के तहत मंगलवार को CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और परीक्षा से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल की गई। कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई और रिपोर्टों के अनुसार सात लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
रेड के कुछ घंटों बाद इस्तीफा
छापेमारी की कार्रवाई के कुछ ही समय बाद JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह 27 फरवरी 2025 को JPSC के अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। इससे पहले वे झारखंड के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से है या जांच से जुड़ी परिस्थितियों के कारण।
क्या है पूरा विवाद?
14वीं JPSC परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि—
- उत्तर कुंजी (Answer Key) कई बार बदली गई।
- अंतिम परिणाम में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
- मेरिट लिस्ट और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे।
- कटऑफ सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी रही।
इन आरोपों के बाद विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने जांच की मांग तेज कर दी थी। इसी क्रम में CID जांच शुरू हुई।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई हलचल
चेयरमैन के इस्तीफे के बाद झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष पहले से ही JPSC भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और विवादित परीक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा था। अब इस्तीफे ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर हैं। संभावित अगले कदमों में शामिल हो सकते हैं—
- JPSC अध्यक्ष के इस्तीफे पर राज्यपाल/सरकार का निर्णय।
- CID की जांच रिपोर्ट।
- यदि अनियमितताओं के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं तो आगे की कानूनी कार्रवाई।
- विवादित परीक्षा और चयन प्रक्रिया पर सरकार का अंतिम फैसला।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि JPSC विवाद अब केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। जांच पूरी होने तक इस्तीफे के पीछे की वास्तविक वजह पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार रहेगा।
