चांडिल में टला बड़ा हादसा: जर्जर पुल से नहर में जा घुसा बालू लदा हाईवा
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाला लेकिन राहत भरा चांडिल पुल हादसा होते-होते टल गया। चांडिल डैम की मुख्य नहर पर स्थित चैनपुर पुल पर बालू लदा एक हाईवा अचानक अनियंत्रित होकर नहर में जा घुसा। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में चालक पूरी तरह सुरक्षित बच निकला, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। यह घटना सुबह करीब सात बजे उस वक्त हुई जब सड़कों पर आवागमन बढ़ने लगता है और स्कूलों का समय होने वाला होता है। इस गंभीर चांडिल पुल हादसा ने एक बार फिर इलाके के जर्जर पुलों और प्रशासन की उदासीनता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ यह भयावह चांडिल पुल हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बालू से भरा हाईवा चैनपुर पुल को पार कर रहा था। अचानक चालक का संतुलन बिगड़ा और वाहन पूरी तरह से अनियंत्रित हो गया। पुल पर सुरक्षा रेलिंग न होने के कारण हाईवा सीधे मुख्य नहर में जा गिरा। यह कल्पना करना भी भयावह है कि यदि पुल पर मजबूत रेलिंग होती, तो शायद यह दुर्घटना टल जाती या इसका प्रभाव कम होता। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्परता दिखाते हुए चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों की सूझबूझ और मदद से एक बड़ा मानवीय नुकसान टल गया, जिसने पूरे इलाके में डर और राहत दोनों का माहौल बना दिया।
ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
इस दुर्घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने संबंधित विभाग और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि चैनपुर मुख्य नहर का यह पुल पिछले आठ से नौ वर्षों से लगातार जर्जर अवस्था में है। पुल की रेलिंग तो बहुत पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, लेकिन आज तक उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों, प्रशासन और यहां तक कि जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं। इतना ही नहीं, अपनी मांग मनवाने के लिए आंदोलन भी किए गए, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उनकी वर्षों पुरानी शिकायतें अनसुनी रह गईं, जिसका नतीजा आज इस चांडिल पुल हादसा के रूप में सामने आया।
क्या समय रहते टाला जा सकता था यह चांडिल पुल हादसा?
ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत कर उस पर सुरक्षा रेलिंग लगा दी जाती, तो मंगलवार की यह दुर्घटना आसानी से टाली जा सकती थी। उनका कहना है कि यह हादसा सीधे तौर पर विभागीय उदासीनता और लापरवाह रवैये का परिणाम है। स्थानीय लोगों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि यदि यह घटना कुछ देर बाद हुई होती, जब स्कूल खुलने का समय होता और पुल पर स्कूली बच्चे या अन्य राहगीर मौजूद होते, तो शायद बड़ी जनहानि हो सकती थी। यह सोच ही रोंगटे खड़े कर देती है कि कैसे प्रशासन की उपेक्षा सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग और चेतावनी
इस घटना के बाद, ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल की तत्काल मरम्मत करने, मजबूत सुरक्षा रेलिंग लगाने और पुल की मजबूती की गहन जांच कराने की जोरदार मांग की है। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि अब भी आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और भी गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह केवल एक पुल का मामला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में कई अन्य जर्जर बुनियादी ढांचों की ओर भी इशारा करता है, जो हर दिन हजारों लोगों के जीवन के लिए खतरा बने हुए हैं। झारखंड जैसे राज्य में जहां ग्रामीण कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है, पुलों और सड़कों का उचित रखरखाव अत्यंत आवश्यक है। झारखंड में बुनियादी ढांचे से जुड़ी अन्य खबरें भी इस बात का प्रमाण देती हैं कि यह एक व्यापक समस्या है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। लोगों का जीवन और सुरक्षा किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
