रांची: ईसाई समुदाय ने 2 नवंबर को ऑल सोल्स डे (All Souls’ Day) मनाया। इसे आम बोलचाल में कब्र पर्व भी कहा जाता है। इस दिन लोग अपने उन प्रियजनों और पूर्वजों को याद करते हैं, जिनका निधन हो चुका है। रांची के कब्रिस्तानों में भी लोग अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों पर पहुंचे, उनकी साफ-सफाई की, फूल चढ़ाए और मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना की।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऑल सोल्स डे क्या है और ईसाई समुदाय इसे क्यों मनाता है?
क्या होता है ‘ऑल सोल्स डे’?
ऑल सोल्स डे ईसाई परंपरा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक दिवस है। विशेष रूप से कैथोलिक चर्च में यह दिन उन सभी दिवंगत विश्वासियों की आत्मा के लिए प्रार्थना करने को समर्पित है, जिनका निधन हो चुका है। इस दिन ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और मुक्ति की कामना की जाती है।
2 नवंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
ईसाई परंपरा में हर साल 2 नवंबर को ऑल सोल्स डे मनाया जाता है। इससे एक दिन पहले यानी 1 नवंबर को ऑल सेंट्स डे (All Saints’ Day) मनाया जाता है। जहां ऑल सेंट्स डे पर संतों और सभी पवित्र आत्माओं को याद किया जाता है, वहीं 2 नवंबर को दिवंगत विश्वासियों के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।
क्यों मनाया जाता है यह पर्व?
ईसाई मान्यता के अनुसार, मृत्यु के बाद भी दिवंगत लोगों के प्रति प्रेम, सम्मान और आध्यात्मिक जुड़ाव बना रहता है। इसी भावना के साथ इस दिन परिवार के सदस्य अपने बिछड़े हुए परिजनों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। यह दिन लोगों को जीवन की नश्वरता और अपनों की यादों के महत्व का भी एहसास कराता है।
इस दिन लोग कब्रिस्तानों में जाकर अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों की सफाई करते हैं। कब्रों पर फूल चढ़ाए जाते हैं, मोमबत्तियां जलाई जाती हैं और विशेष धार्मिक प्रार्थनाएं की जाती हैं। कई जगह चर्च में विशेष मिस्सा (Mass) और प्रार्थना सभाओं का आयोजन भी होता है।
इस तरह ऑल सोल्स डे केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि दिवंगत प्रियजनों को याद करने, उनके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का विशेष अवसर है।
