Monday, November 2

12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रही पानी की टंकी का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका था… विभाग ने केरेडारी थाने में दर्ज कराई FIR

रांची: हजारीबाग के बड़कागांव में NTPC के खनन कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के एक निर्माणाधीन पानी के टावर को डायनामाइट से ध्वस्त किए जाने के मामले में राज्य सरकार ने कंपनी पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद के मुताबिक, इस कार्रवाई से सरकार को करीब 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मामले में विभाग की ओर से केरेडारी थाने में FIR भी दर्ज कराई गई है। हालांकि, NTPC ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि संबंधित जमीन खनन क्षेत्र के अंतर्गत आती है और इस संबंध में जिला प्रशासन को पहले ही सूचना दी गई थी।

मंत्री योगेंद्र प्रसाद के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से 12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कराया जा रहा था। इसका करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका था। आरोप है कि NTPC ने विभाग को पूर्व सूचना दिए बिना डायनामाइट से टावर को ध्वस्त कर दिया। इसके अलावा इलाके में बिछाई गई कई पाइपलाइन को भी क्षतिग्रस्त किया गया है।

मंत्री ने दावा किया कि पानी के टावर और पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने से सरकारी खजाने को करीब 25 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करने और नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है। विभाग की ओर से केरेडारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

मंत्री योगेंद्र प्रसाद का कहना है कि किसी भी सरकारी परिसंपत्ति को नुकसान पहुंचाने से पहले संबंधित विभाग को सूचना देना जरूरी है। यदि जांच में NTPC की कार्रवाई से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो कंपनी को इसकी भरपाई करनी होगी।

NTPC ने बताया खनन क्षेत्र की जमीन

दूसरी ओर, NTPC के वरीय अधिकारियों ने मंत्री के आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। कंपनी के मुताबिक, जिस जमीन पर पानी का टावर बनाया गया था, वह खनन क्षेत्र के अंतर्गत आती है। NTPC का दावा है कि इस संबंध में जिला प्रशासन को पहले ही पत्राचार के माध्यम से जानकारी दी गई थी। कंपनी ने यह भी कहा है कि पानी की टंकी को हटाने को लेकर लंबे समय से पत्राचार किया जा रहा था।

फिलहाल इस मामले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और NTPC के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक ओर विभाग करीब 25 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा कर रहा है, वहीं NTPC संबंधित जमीन को खनन क्षेत्र का हिस्सा बताते हुए अपनी कार्रवाई को उचित ठहरा रहा है।

अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पानी के टावर को ध्वस्त करने से पहले किन स्तरों पर अनुमति और सूचना की प्रक्रिया अपनाई गई थी। साथ ही, सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है और इसके लिए किसकी जवाबदेही तय होगी, यह भी जांच के बाद ही सामने आएगा।

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