Monday, November 2

1966-67 में आवंटित हुई थी 5100 वर्गफीट जमीन, 2003 में दोबारा आवंटन, 2004 में निर्माण की अनुमति

Ranchi News: रांची के जालान रोड और अपर बाजार के दुकानदारों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम की ओर से दुकानों का लाइसेंस रद्द करने और दुकान खाली कराने से संबंधित पुराने आदेशों को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने इस मामले में दाखिल आठ रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नगर निगम को नए सिरे से पूरी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम संबंधित दुकानदारों का पक्ष सुनेगा, उनके दस्तावेजों और दलीलों पर विचार करेगा और इसके बाद नया कारणयुक्त आदेश पारित करेगा। इसके लिए अदालत ने निगम को 12 सप्ताह का समय दिया है। खास बात यह है कि जब तक नगर निगम अंतिम निर्णय नहीं लेता, तब तक याचिकाकर्ताओं का दुकानों पर कब्जा प्रभावित नहीं किया जाएगा।

जालान रोड और अपर बाजार की दुकानों से जुड़ा है विवाद

यह मामला रांची के जालान रोड और अपर बाजार स्थित दुकानों एवं जमीन के लाइसेंस और पुनः आवंटन से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम की ओर से जारी तीन पुराने आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इनमें 14 अक्टूबर 2014 को लाइसेंस रद्द करने का आदेश, 4 दिसंबर 2014 को दुकान खाली कराने का निर्देश और 13 फरवरी 2015 को पारित आदेश शामिल थे। सभी आठ रिट याचिकाओं को एक साथ टैग कर अदालत में सुनवाई की गई।

 

1966-67 में आवंटित हुई थी 5100 वर्गफीट जमीन

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि जालान रोड स्थित लगभग 5100 वर्गफीट जमीन वर्ष 1966-67 में तत्कालीन रांची नगरपालिका ने मोहन लाल कच्ची को आवंटित की थी। इस जमीन पर टेंट हाउस का कारोबार संचालित किया जा रहा था। बाद में उनके उत्तराधिकारी महेंद्र कुमार कच्ची ने वर्ष 2000 में कुछ प्रार्थियों के साथ साझेदारी में कारोबार शुरू किया। हालांकि, आपसी सहमति से साझेदारी समाप्त होने के बाद जमीन को प्रार्थियों के पक्ष में दोबारा आवंटित करने का अनुरोध किया गया।

 

2003 में दोबारा आवंटन, 2004 में निर्माण की अनुमति

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के अनुसार, रांची नगर निगम ने 9 दिसंबर 2003 को संबंधित जमीन प्रार्थियों के नाम आवंटित की थी। इसके बाद 5 जून 2004 को लाइसेंस शुल्क के आधार पर समझौता किया गया। जमीन पर स्थायी निर्माण कराने के लिए नगर निगम से अनुमति मांगी गई थी, जिसे 6 अगस्त 2004 को स्वीकृति भी मिली थी। बाद में दुकानों के पुनः आवंटन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। अधिवक्ता ने बताया कि नगर निगम ने 9 सितंबर 2014 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके जवाब के बाद 14 अक्टूबर 2014 को लाइसेंस रद्द करने और दुकानें खाली करने का आदेश पारित किया गया।

तीन पुराने आदेशों को हाईकोर्ट ने किया निरस्त

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नगर निगम की ओर से 14 अक्टूबर 2014 को पारित आदेश महज तीन पंक्तियों का था। उसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से दी गई दलीलों और दस्तावेजों पर समुचित विचार नहीं किया गया था। अदालत ने 13 फरवरी 2015 के आदेश में भी तथ्यों और संबंधित दस्तावेजों पर पर्याप्त विचार नहीं किए जाने की बात कही। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी वैधानिक प्राधिकार को संबंधित पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही आदेश पारित करना चाहिए। केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पीछे उचित कारण भी होने चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने 14 अक्टूबर 2014, 4 दिसंबर 2014 और 13 फरवरी 2015 के आदेशों को निरस्त कर दिया।

नगर निगम को 12 सप्ताह में नया कारणयुक्त आदेश देना होगा

हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का उचित अवसर दे। उनके पक्ष में प्रस्तुत दस्तावेजों और दलीलों पर विचार करने के बाद नया कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को 12 सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। तब तक याचिकाकर्ताओं का दुकानों पर कब्जा बरकरार रहेगा और नगर निगम की ओर से पुराने आदेशों के आधार पर उन्हें बेदखल नहीं किया जाएगा।

नगर निगम ने लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन का उठाया मुद्दा

दूसरी ओर, रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता राहुल कुमार ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और विवाद का संबंध दुकानों को दूसरे पक्ष को देने यानी सबलेटिंग से है। नगर निगम की ओर से यह भी दलील दी गई कि संबंधित जमीन पर विकास कार्य कराने की आवश्यकता है। इसी आधार पर निगम ने अपने आदेशों को उचित बताते हुए याचिकाओं को खारिज करने का आग्रह किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने पुराने आदेशों को निरस्त करते हुए निगम को कानून के अनुसार नए सिरे से सुनवाई और निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

दुकानदारों को फिलहाल राहत, अब निगम के नए फैसले पर नजर

हाईकोर्ट के इस आदेश से जालान रोड और अपर बाजार के संबंधित दुकानदारों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अब नगर निगम को 12 सप्ताह के भीतर सभी संबंधित पक्षों को सुनकर नया आदेश देना होगा। इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने दुकानों के लाइसेंस और पुनः आवंटन विवाद का अंतिम निपटारा नहीं किया है, बल्कि नगर निगम के पुराने आदेशों को निरस्त कर निष्पक्ष सुनवाई के बाद नए सिरे से निर्णय लेने को कहा है। ऐसे में अब सबकी नजर नगर निगम की अगली कार्रवाई पर रहेगी।

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