Friday, October 2

रांची, 1 अक्टूबर 2026। स्वच्छता ही सेवा–2026 अभियान के तहत गुरुवार को रांची जिले के नामकुम प्रखंड में विशेष स्वच्छता श्रमदान एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। निदेशालय, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), झारखंड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विभागीय मंत्री, वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्वच्छता कर्मी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ना, प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा।

मंत्री ने किया श्रमदान, लोगों से स्वच्छता को व्यवहार में उतारने की अपील

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभागीय मंत्री ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपने घर, गांव और आसपास के सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने तथा स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

मंत्री ने स्वयं कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता श्रमदान किया। उनके साथ जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वच्छता कर्मियों और स्थानीय लोगों ने भी सफाई अभियान में हिस्सा लिया। सामूहिक श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता के प्रति सामुदायिक भागीदारी का संदेश दिया गया।

कपड़े के थैले बांटकर प्लास्टिक के कम इस्तेमाल का संदेश

कार्यक्रम के दौरान एकल-उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए आम नागरिकों के बीच कपड़े के थैलों का वितरण किया गया। लोगों को प्लास्टिक के विकल्प के रूप में कपड़े के थैले अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

मंत्री ने कहा कि छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलावों के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में “कपड़े का थैला अपनाएं, प्लास्टिक का उपयोग घटाएं” का संदेश प्रमुखता से दिया गया।

पौधारोपण से स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

स्वच्छता अभियान को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कार्यक्रम में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण किया गया। मंत्री और विभागीय पदाधिकारियों ने पौधे लगाए तथा लोगों से हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के संरक्षण में भागीदारी निभाने की अपील की।

कार्यक्रम में स्वच्छता शपथ, सेल्फी प्वाइंट और अन्य जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की गईं। गुब्बारे उड़ाकर स्वच्छता एवं जन-जागरूकता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रसारित किया गया।

कचरा प्रबंधन और जनभागीदारी पर सचिव ने दिया जोर

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने कहा कि स्वच्छता व्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन (SLWM) को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने लोगों से कचरे का उचित प्रबंधन करने, अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने और प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने की अपील की। उन्होंने स्वच्छता को निरंतर जन-अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

व्यवहार परिवर्तन को अभियान की सफलता का आधार बताया

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की मिशन निदेशक रंजीता हेम्ब्रम ने स्वच्छता ही सेवा अभियान को केवल आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे निरंतर जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन का अभियान बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने लोगों से घर और आसपास से स्वच्छता की शुरुआत कर इसे गांव और पंचायत स्तर तक सामूहिक प्रयास के रूप में आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने गीले और सूखे कचरे के उचित प्रबंधन, कचरा इधर-उधर नहीं फेंकने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने और स्वच्छता कर्मियों के प्रति सम्मान का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ गांव के लिए साफ-सफाई के साथ जिम्मेदार नागरिक व्यवहार, बेहतर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी है।

पदाधिकारी और सहयोगी संस्थाएं रहीं मौजूद

कार्यक्रम में संयुक्त सचिव शशिंद्र बड़ाइक, नामकुम प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी, UNICEF के WASH Expert कुमार प्रेमचंद सहित विभागीय पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। राज्य, जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समुदाय के समन्वय से कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया गया।

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