41 वर्षों से संचालित एनसीसी यूनिट बंद होने से ग्रामीण विद्यार्थियों के अवसर प्रभावित होने की आशंका, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को सौंपा ज्ञापन
बुंडू स्थित पीपीके कॉलेज में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की यूनिट बंद किए जाने का मामला अब राजभवन तक पहुंच गया है। इस मुद्दे को लेकर JLKM के उपाध्यक्ष एवं छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर एनसीसी यूनिट को दोबारा शुरू कराने की मांग की। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए यूनिट बंद किए जाने के कारणों की समीक्षा कराने और इसके नियमित संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
देवेंद्रनाथ महतो के अनुसार, पीपीके कॉलेज में पिछले 41 वर्षों से एनसीसी यूनिट संचालित हो रही थी। इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को इससे जुड़कर प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला। उनका कहना है कि एनसीसी केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण इस वर्ष से कॉलेज की एनसीसी यूनिट बंद कर दी गई है। हालांकि, यूनिट बंद होने के आधिकारिक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीण विद्यार्थियों के सामने बढ़ सकती हैं मुश्किलें
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि पीपीके कॉलेज की एनसीसी यूनिट बुंडू और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रही है। बुंडू के अलावा तमाड़, सोनाहातू, सिल्ली और राहे क्षेत्र के छात्र भी इससे लाभान्वित होते रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में किसान और मजदूर परिवार रहते हैं। आर्थिक सीमाओं के कारण कई परिवार अपने बच्चों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे शहरों में नहीं भेज सकते। ऐसे में स्थानीय कॉलेज में एनसीसी की सुविधा उपलब्ध होना विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।
उनका कहना है कि यूनिट बंद होने से ग्रामीण विद्यार्थियों को एनसीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसरों में कमी आ सकती है। इससे उन छात्रों को भी परेशानी हो सकती है, जो अनुशासन, नेतृत्व और शारीरिक प्रशिक्षण के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहते हैं।
शिक्षा और करियर के अवसरों पर भी जताई चिंता
छात्र नेता ने एनसीसी प्रशिक्षण के शैक्षणिक और व्यावसायिक महत्व का भी उल्लेख किया। एनसीसी से विद्यार्थियों को अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित करने में मदद मिलती है। इसके प्रमाणपत्र कुछ शैक्षणिक संस्थानों, भर्तियों और करियर विकल्पों में निर्धारित नियमों के तहत लाभ दे सकते हैं।
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि ग्रामीण विद्यार्थियों को इन अवसरों से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने संबंधित विश्वविद्यालय और विभाग की भूमिका की समीक्षा कर यह पता लगाने की मांग की कि वर्षों से संचालित यूनिट को बंद करने की नौबत क्यों आई।
राज्यपाल से हस्तक्षेप और यूनिट की बहाली की मांग
इस मुद्दे पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को ज्ञापन सौंपते हुए देवेंद्रनाथ महतो ने पीपीके कॉलेज की एनसीसी यूनिट को फिर से बहाल करने की मांग की। उन्होंने आग्रह किया कि मामले की जांच कराई जाए और यूनिट का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को पहले की तरह प्रशिक्षण का अवसर मिल सके।
देवेंद्रनाथ महतो के अनुसार, राज्यपाल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित विभाग और विश्वविद्यालय से बातचीत करने का आश्वासन दिया है। अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की नजर रहेगी।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
देवेंद्रनाथ महतो ने स्पष्ट किया कि यदि एनसीसी यूनिट की बहाली को लेकर जल्द पहल नहीं की गई, तो छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों को साथ लेकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
फिलहाल, पीपीके कॉलेज की एनसीसी यूनिट बंद होने के कारणों और उसकी बहाली को लेकर संबंधित विश्वविद्यालय या विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
