Monday, September 21

रांची/तमाड़। रांची के जिला खनन पदाधिकारी मो. अबु हुसैन की ओर से बुंडू क्षेत्र में जांच के बाद यह कहा गया था कि अवैध तरीके से बालू उठाव या परिवहन जैसी कोई गड़बड़ी नहीं मिली और जिन वाहनों से बालू ले जाया जा रहा था, वह स्टॉक से आया था। वाहनों के चालान काटे जाने की बात भी कही गई थी। लेकिन अब तमाड़ की कांची नदी से सामने आ रही तस्वीरें और ग्रामीणों की शिकायतें इसी दावे पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं

DMO साहब, अगर नदी से बालू नहीं उठाया जा रहा, तो कांची नदी में जेसीबी और ट्रैक्टर क्या कर रहे हैं? और अगर बालू स्टॉक का है, तो वह स्टॉक आखिर है कहां? कही पूरी नदी ही तो स्टॉक नहीं है न?

Jharkhand Digital ने इससे पहले भी बुंडू इलाके में बालू उठाव का मामला उठाया था। नदी घाटों पर जेसीबी से बालू उठाने, ट्रैक्टरों से ढुलाई और रात में हाइवा के जरिए बालू ले जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। खबर के बाद DMO और SDPO मौके पर पहुंचे थे और अधिकारियों की ओर से जांच में गड़बड़ी नहीं मिलने की बात कही गई थी।

इसे भी पढ़े – पलामू DMO बनने की जुगाड़ में रांची DMO अबु हुसैन?

इसके बाद 7 सितंबर की फॉलोअप रिपोर्ट में फिर यही सवाल सामने रखा गया – अगर बालू वैध स्टॉक का है, तो वह स्टॉक जमीन पर कहां है? कही वो स्टॉक नदी के नीचे तो नहीं ?

अब कांची नदी से जुड़ा नया मामला इन सवालों को और गंभीर बना रहा है।

नदी को ही स्टॉक मान लिया गया है क्या?

तमाड़ की बादला-हराडीह और बामलाडीह घाट से बड़े पैमाने पर बालू उठाव की शिकायत सामने आई है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर और दर्जनों हाइवा-ट्रेलर बालू लेकर निकल रहे हैं और इससे लाखों रुपये का कारोबार हो रहा है।

अगर नदी की तलहटी से ही बालू निकाला जा रहा है, तो फिर सवाल उठाना तो लाज़मी है – आखिर किस स्टॉक का बालू बताया जा रहा है?

क्योंकि चालान होना अलग बात है और बालू का स्रोत वैध होना अलग। किसी वाहन के पास चालान है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उस वाहन में लदा बालू किस वैध स्टॉक से आया, स्टॉक कहां है और उसकी मात्रा कितनी है।

कागज नहीं… नदी का तल देखिए साहब

Jharkhand Digital की पिछली रिपोर्ट में भी यही सवाल उठाया गया था कि अगर प्रशासन का दावा है कि बालू वैध स्टॉक से आ रहा है, तो उस स्टॉक का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। अब कांची नदी के मामले में भी यही सवाल है। पूरी नदी ही स्टॉक होल्डर के नाम पर कर दी गई है क्या ?

इसे भी पढ़े – बालूघाट से अवैध बालू कारोबार कर रहा रांची पुलिस को बदनाम ! रांची DMO से संभल नहीं रहा जिला या …?

साहब जरा पूल के नीचे भी झांक लीजिये…

मामला सिर्फ अवैध कारोबार के आरोप तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने कांची नदी में पुल के आसपास और पुल के नीचे से बालू उठाए जाने को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगातार और अत्यधिक बालू निकासी से पुल के पिलरों के आसपास की मिट्टी और बालू हट सकती है। इससे भविष्य में पुल की नींव और संरचनात्मक मजबूती पर असर पड़ने की आशंका है।

ऐसे में खनन विभाग से सवाल है कि क्या पुल के आसपास बालू उठाने की अनुमति दी गई है? अगर नहीं तो इसकी जांच कौन करेगा? इतने खुले में चोरी हो रही है साहब…आँखों से पर्दा हटाइये और गौर फरमाइए।

इसे भी पढ़े – आखिर कौन हैं बुंडू के बालूचोर?

पहले बुंडू में सवाल, अब कांची नदी में वही कहानी?

Jharkhand Digital ने 5 सितंबर को बुंडू में बालू उठाव को लेकर सवाल उठाए थे। उसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच के बाद अवैध उठाव नहीं मिलने की बात कही गई। अधिकारियों के अनुसार बालू स्टॉक से था।

7 सितंबर की रिपोर्ट में इसी दावे पर फिर सवाल उठाया गया था कि आखिर वह वैध स्टॉक है कहां? चालान काटना पर्याप्त है या बालू के वास्तविक स्रोत और स्टॉक का मिलान भी जरूरी है?

अब कांची नदी की शिकायतों ने उसी बहस को फिर सामने ला दिया है।

तो क्या हर बार नदी के किनारे से बालू उठता रहेगा और जांच के बाद कागजों में सब कुछ वैध निकल जाएगा?

DMO साहब, जनता यह जानना चाहती है कि नदी से निकल रहा बालू आखिर किस स्टॉक से आ रहा है।

इसे भी पढ़े – रांची DMO साहब..आंखों पर पट्टी तो है लेकिन नो….की पट्टी क्या ?

राजकिशोर कुशवाहा और ज्योत्सना केरकेट्टा की चुप्पी भी सवालों में…क्यों रद्द हुआ प्रेस कांफ्रेंस ?

इसी मामले को लेकर कुछ दिन पहले आजसू के वरीय उपाध्यक्ष राजकिशोर कुशवाहा की ओर से 8 सितंबर को रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा की गई थी। इसमें बुंडू के बालू कारोबार से जुड़े मुद्दों और कथित पुख्ता सबूतों को सामने रखने की बात कही गई थी।

लेकिन किसी कारणवश उसे रद्द कर दिया गया था। राजकिशोर कुशवाहा और ज्योत्सना केरकेट्टा ने जिन सवालों को लेकर खुलासा करने की बात कही थी, उस पर अब चुप्पी क्यों है?

क्या कोई दबाव था? कोई प्रभाव था? या फिर कोई दूसरी वजह?

आनंद साहू और तेजू महतो पर मेहरबानी किसकी? ‘बड़े आदमी’ के साये में कार्रवाई भी बेबस?

बढ़ते जा रहे हैं लेकिन आनंद साहू और तेजू महतो के नाम पर कार्रवाई का मामला अब भी वहीं का वहीं है। स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि दोनों को किसी ‘बड़े आदमी’ का संरक्षण हासिल है और इसी संरक्षण के साये में उनकी पत्नी और साले ने पूरे खेल की कमान संभाल रखी है।

अगर आरोप गलत हैं तो फिर कार्रवाई कर इन्हें बेनकाब करने में दिक्कत क्या है? और अगर आरोपों में दम है, तो फिर कार्रवाई के नाम पर प्रशासन की चुप्पी क्यों? हालात देखकर तो यही सवाल उठता है कि अधिकारियों की नींद भले उड़ी हो, लेकिन शायद हाथ किसी ऐसे ‘साहब’ ने बांध रखे हैं, जिनके आगे कार्रवाई की फाइल भी कदम बढ़ाने से पहले सोचती है।

DMO साहब, जिले में खनन की जिम्मेदारी है तो जवाब भी देना होगा

झारखंड के 24 जिलों में सिर्फ 17 जिलों में DMO स्तर की व्यवस्था है और रांची में मो. अबु हुसैन को DMO की जिम्मेदारी दी गई है

ऐसे में रांची जैसे जिले में, जहां बालू को लेकर लगातार सवाल सामने आ रहे हैं, खनन विभाग की जवाबदेही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। DMO साहब, सवाल किसी व्यक्ति विशेष से दुश्मनी का नहीं है।

इसे भी पढ़े – JHARKHAND DIGITAL EXCLUSIVE: खनन बहुल झारखंड में प्रशासनिक संकट: केवल 17 जिलों में DMO पदस्थापित, 7 जिलों में निरीक्षकों और प्रभारियों के भरोसे चल रहा विभाग

सवाल है नदी का।

सवाल है सरकारी राजस्व का।

सवाल है पर्यावरण का।

सवाल है पुल की सुरक्षा का।

और सवाल है उस दावे का, जिसमें कहा गया कि अवैध बालू उठाव नहीं मिल रहा और बालू स्टॉक से आ रहा है।

अब कांची नदी की तस्वीरें और ग्रामीणों की शिकायतें सामने हैं।

तो फिर बताइए DMO साहब कि कांची नदी में यह बालू आखिर किसका स्टॉक है?

और अगर सच में सब कुछ वैध है, तो स्टॉक दिखाइए, स्रोत बताइए और जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक कीजिए।

क्योंकि नदी को स्टॉक बताकर अगर कारोबार चल रहा है, तो यह सिर्फ बालू का मामला नहीं यह सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है।

इसे भी पढ़े – JHARKHAND DIGITAL EXCLUSIVE: बुंडू के बालूचोर, DMO साहब…क्या नदी के नीचे है पूरा स्टाॅकयार्ड जिसे निकाल रहे बालूचोर ?

Share.

Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

Next Story
किडनी फेल होने से पहले शरीर देता है ये संकेत, जानें कैसे करें बचाव
Exit mobile version