रांची: बुंडू में बालू के अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा किया गया है। NGT की रोक के बावजूद नदी से बालू उठाने, पुलिस चेकिंग के नाम पर पर अवैध कारोबार को संरक्षण देने और जनता को गुमराह करने के आरोपों को लेकर अब 8 सितंबर को रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन आजसू के वरीय उपाध्यक्ष राजकिशोर कुशवाहा की ओर से किया जा रहा है। कार्यक्रम में बुंडू के बालू कारोबार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर जानकारी और आवश्यक तथ्य मीडिया के सामने रखे जाएंगे। आयोजक का दावा है कि पूरे पुख्ता सबूत के साथ यह बताया जाएगा कि किसके संरक्षण में बालू का अवैध कारोबार किया जा रहा है।
8 सितंबर को रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस
प्रेस कॉन्फ्रेंस 8 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे रांची प्रेस क्लब में होगी। आयोजक ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों से कार्यक्रम में पहुंचकर इसे कवर करने की अपील की है।
पोस्टर में मुख्य सवाल सीधे तौर पर बुंडू के बालू कारोबार को लेकर उठाया गया है। इसमें NGT की रोक के बावजूद नदी से बालू उठाने और पुलिस चेकिंग की आड़ में अवैध बालू कारोबार को वैध दिखाने तथा लोगों को गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं।
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Jharkhand Digital ने पहले ही उठाया था बुंडू के बालू का मुद्दा
बुंडू में बालू उठाव का यह मामला Jharkhand Digital की टीम पहले ही प्रमुखता से उठा चुकी है। 5 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में नदी घाटों पर जेसीबी से बालू उठाने, ट्रैक्टरों से ढुलाई और रात में हाइवा के जरिए बालू ले जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में यह भी सवाल किया गया था कि NGT की रोक के बावजूद अगर नदी से बालू उठाया जा रहा है, तो आखिर इसे किस वैध स्टॉक का हिस्सा बताया जा रहा है।
Jharkhand Digital की रिपोर्ट के बाद DMO और SDPO मौके पर पहुंचे और नदी घाटों तथा बालू परिवहन से जुड़े मामलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि जांच के दौरान अवैध तरीके से बालू उठाव या परिवहन जैसी कोई गड़बड़ी नहीं मिली। अधिकारियों के मुताबिक, बालू ले जा रहे वाहनों के चालान काटे गए थे और बालू स्टॉक से लाया जा रहा था।
लेकिन यहीं से एक और सवाल सामने आया – अगर बालू वैध स्टॉक का है, तो वह स्टॉक आखिर है कहां?
नदी की तलहटी से उठ रहे बालू को किस स्टॉक से जोड़ा जा रहा?
Jharkhand Digital की पिछली रिपोर्ट में प्रशासन के इस दावे पर सवाल उठाते हुए पूछा गया था कि यदि नदी से उठाया जा रहा बालू वैध स्टॉक से लिया जा रहा है, तो उस स्टॉक की वास्तविक स्थिति क्या है।
रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या स्टॉक की भौतिक जांच हुई? कागजों में मौजूद बालू और जमीन पर मौजूद स्टॉक का मिलान किया गया या नहीं? क्योंकि रिपोर्ट में नदी की तलहटी से जेसीबी और ट्रैक्टर के जरिए बालू उठाए जाने की तस्वीरों का हवाला दिया गया था।
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चालान है तो बालू का स्रोत भी साफ होना चाहिए
पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल बालू लदे वाहनों के चालान को लेकर भी है। प्रशासन की ओर से वाहनों के चालान काटे जाने की बात कही गई थी।
लेकिन सवाल यह है कि चालान के साथ बालू का स्रोत भी स्पष्ट है या नहीं? जिस स्टॉक से बालू आने का दावा किया जा रहा है, क्या उसकी मात्रा और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया गया है? यही वे सवाल हैं जिन्हें Jharkhand Digital की रिपोर्ट में प्रमुखता से उठाया गया था।
कुछ नामों को लेकर भी उठे सवाल
Jharkhand Digital की पिछली रिपोर्ट में आनंद साहू और तेजू साहू के नाम का भी उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में उनके बारे में स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों और बालू कारोबार में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यदि शिकायतों में किसी व्यक्ति का नाम सामने आता है, तो जांच उन नामों तक भी पहुंचनी चाहिए।
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अब प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या सामने आएगा?
अब 8 सितंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आयोजक की ओर से “पूरे पुख्ता सबूत के साथ” बुंडू में बालू के अवैध कारोबार और उसके संरक्षण से जुड़े तथ्यों को मीडिया के सामने रखने का दावा किया गया है।
फिलहाल नजर 8 सितंबर, सुबह 11:30 बजे रांची प्रेस क्लब में होने वाली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर है। बुंडू के बालू कारोबार को लेकर उठे सवालों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि आयोजक जिन “पुख्ता सबूतों” की बात कर रहे हैं, वे क्या हैं और उनसे कौन कौन से नए तथ्य आने वाले है।
